फिर आबाद होंगी चारधाम यात्रा मार्ग की चट्टियां: पर्यटन मंत्री

देहरादून । संवाददाता। किसी भी क्षेत्र को जानने-समझने का सबसे उपयुक्त तरीका है कि वहां पैदल घूमने के साथ ही एक-दूसरे के अनुभव बांटे जाएं। इस लिहाज से दुनिया का प्राचीनतम उत्तराखंड का चारधाम सर्किट महत्वपूर्ण है। तीन हजार साल पहले से चले आ रहे चारधाम के इस पैदल ट्रेल को सरकार सर्किट के रूप में विकसित करेगी।

पत्रकारों से बातचीत में पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि इस ट्रेल अथवा सर्किट के फिर से अस्तित्व में आने पर इस पैदल मार्ग की चट्टियां (पड़ाव) आबाद होंगी।पर्यटन मंत्री ने कहा कि बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री व यमुनोत्री को जोडने वाला यह सर्किट पर्यटकों के लिए सबसे पसंदीदा होगा। उन्होंने नेपाल के अन्नपूर्णा सर्किट और इक्वाडोर से चिली तक इंका सर्किट का भी उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड का चारधाम सर्किट हर दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि इस सर्किट में ऐसी व्यवस्था की जाएगी कि ये गांवों से लिंक हों। जगह-जगह सुविधाएं मिलने से देशी-विदेशी सैलानी अधिक आकर्षित होंगे। इस सिलसिले में जल्द ही कॉफी टेबल बुक भी रिलीज की जाएगी।

पर्यटन मंत्री ने कहा कि पलायन रोकने की दिशा में चारधाम समेत अन्य मंदिरों में अर्पित होने वाली तुलसी व फूलों के कृषिकरण से ही आर्थिकी संवर सकती है। बदरीनाथ का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहां भगवान बदरी विशाल को हर यात्रा सीजन में 80 कुंतल और विभिन्न 10 अवसरों पर 150 कुंतल तुलसी अर्पित की जाती है।

साथ ही 80 कुंतल के करीब यात्री प्रसाद लेते हैं। इसकी अनुमानित आय करीब 58 लाख आंकी गई है। इस हिसाब से सभी जगह पूजन सामग्री, प्रसाद के मद्देनजर ही ध्यान केंद्रित किया जाए तो स्थानीय निवासियों को अच्छी आय हो सकती है।

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