बचा सकता है हार्ट फेल्योर में जान: वेंट्रिकुलर असिस्ट डिवाइस

 देहरादून। संवाददाता। हार्ट ट्रांसप्लांट नहीं होने की दशा में एडवांस हार्ट फेल्योर में मरीजों की जान ‘वेंट्रिकुलर असिस्ट डिवाइस’ से बचाई जा सकती है। बैटरी संचालित यह कंट्रोल पैनल (डिवाइस) हार्ट की तरह शरीर में ब्लड की पंपिंग करता है। दिल्ली स्थित फोर्टिस हार्ट इंस्टीट्यूट ने रुड़की निवासी 47 वर्षीय पंकज मित्तल की जान इस तरह का डिवाइस लगाकर बचाई है।

अस्पताल के कार्डियो थोरेसिक वैस्कुलर सर्जरी के डायरेक्टर डॉ. जेएडएस मेहरवाल ने बुधवार को राजपुर रोड स्थित एक होटल में आयोजित पत्रकार वार्ता में बताया कि हृदय रोग व हार्ट फेल्योर की समस्या अब हर आयु वर्ग के लोगों को हो रही है। कई मामलों में शुरुआती चरण में हृदय से संबंधित बीमारी का पता नहीं लग पाता है।

इसका परिणाम यह होता है कि इस तरह केमरीज बाद में एडवांस हार्ट फेल्योर की स्थिति में पहुंच जाते हैं। ऐसे मरीजों को बचाने के लिए एडवांस कार्डियक प्रक्रिया से उपचार करना पड़ता है। इस प्रक्रिया में भी पहले हार्ट ट्रांसप्लांट को प्राथमिकता दी जाती है। हार्ट ट्रांसप्लांट तभी संभव है जबकि मरीज को हार्ट डोनर मिल जाए।

उन्होंने बताया कि हार्ट ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया सिर्फ पांच घंटे के अंतर्गत ही की जा सकती है। अस्पताल में कोटद्वार निवासी 22 वर्षीय रोहन मनराल का सफल हार्ट ट्रांसप्लांट किया है। हार्ट ट्रांसप्लांट नहीं होने पर वेंट्रिकुलर असिस्ट डिवाइस ही एकमात्र ऐसा विकल्प बचता है, जिससे मरीज की जान बचाई जा सकती है। हालांकि यह प्रक्रिया बहुत महंगी है।

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