देवसंस्कृति विश्वविद्यालय में सिखायेगा सुरक्षा के लिए ताई ची

देहरादून। संवाददाता। हरिद्वार स्थित देवसंस्कृति विश्वविद्यालय में जल्द ही एक नए पाठ्यक्रम की शुरुआत होने जा रही है, जो योग और ताई ची का मिलाजुला रूप होगा। इसके लिए देवसंस्कृति विश्वविद्यालय और चीन के कुनमिंग स्थित यूनान मिंजू विश्वविद्यालय के बीच बुधवार को एमओयू साइन हुआ। साथ ही विवि परिसर में ताई ची केंद्र का अनावरण भी हुआ, जो चीन से बाहर खुलने वाला प्रथम केंद्र है। ताई ची एक चीनी मार्शल आर्ट पद्धति है, जो यिंग और यांग को आधार मानकर मानवीय क्षमताओं को असर कारक बनाती है। जबकि, योग मनुष्य की आंतरिक क्षमताओं को जागृत कर श्रेष्ठता की ओर अग्रसर करता है।

देवसंस्कृति विश्वविद्यालय पहुंचे चीन के प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय की विविध गतिविधियों को जाना। कहा कि भारत और चीन मिलकर विश्व को परंपरागत विशेषताओं का तोहफा प्रदान कर सकते हैं। देवसंस्कृति विवि के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पंड्या ने भारत और चीन की ऐतिहासिक परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ताई ची शारीरिक स्वास्थ्य की संपदाओं से परिपूर्ण है तो योग मानसिक एवं आत्मिक संपदाओं का भंडार।

दोनों के अभ्यास से मनुष्य संपूर्ण स्वास्थ्य का उपहार प्राप्त कर सकेगा। इस दौरान यूनानी मिंजू विश्वविद्यालय के प्रतिनिधियों ने ताई ची पद्धति का प्रदर्शन भी किया।इस अवसर पर यूनानी मिंजू विश्वविद्यालय के उपाध्यक्ष लियो हैबिन, डीन प्रो. जिओ जिंगडांग, निदेशक यू एक्सीनील व प्रोफेसर यूफैग सहित देवसंस्कृति विवि के प्रो. सुरेश, प्रो सुखनंदर, डॉ. अरुणेश, दुर्गेश द्विवेदी, डॉ संगीता कुमारी, कावेरी बाली आदि पदाधिकारी उपस्थित थे।

बता दें कि देवसंस्कृति विवि बीते एक वर्ष से यूनानी मिंजू विवि के छात्रों को योग सिखाने के अपने शिक्षक चीन भेज रहा है। इसी तरह चीन से भी ताई ची का प्रशिक्षण देने के लिए शिक्षक देवसंस्कृति विवि आएंगे।

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