अनिल बलूनी ले आये राज्यसभा का टिकट, ताकते रह गए दिग्गज, अमित साह से निकटता आयी काम

श्री बलूनी ने लम्बे समय से इस सीट पर आँख गढ़ाए दिग्गजों से पार पाते हुए टिकट प्राप्त करने में सफलता पाई। बलूनी को राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित साह से निकटता के कारण टिकट पाने में आसानी रही। विधानसभा में भाजपा का तीन-चौथाई बहुमत होने से बलूनी की जीत सुनिश्चित है।

देहरादून : अंतत: भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया समन्वयक एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता उत्तराखंड से राज्यसभा का टिकट पाने में सफल रहे। भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने रविवार शाम उत्तराखंड की राज्यसभा सीट के प्रत्याशी के रूप में बलूनी के नाम पर मुहर लगा दी। श्री बलूनी ने लम्बे समय से इस सीट पर आँख गढ़ाए दिग्गजों से पार पाते हुए टिकट प्राप्त करने में सफलता पाई। बलूनी को राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित साह से निकटता के कारण टिकट पाने में आसानी रही।

विधानसभा में भाजपा का तीन-चौथाई बहुमत होने से बलूनी की जीत सुनिश्चित है। कांग्रेस द्वारा प्रत्याशी न उतारने की घोषणा के बाद यह भी लगभग तय है कि भाजपा प्रत्याशी का निर्वाचन निर्विरोध ही होगा।

उत्तराखंड से राज्यसभा की एक सीट के लिए कई दिग्गज दावेदार थे। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट के नाम मुख्य थे। इनके अलावा भाजपा के केंद्रीय संगठन में महत्वपूर्ण पदों पर आसीन कई वरिष्ठ नेता भी दावेदारी कर रहे थे।

इनमें अनिल बलूनी के साथ ही भाजपा के उत्तराखंड प्रभारी श्याम जाजू और राष्ट्रीय सह महामंत्री संगठन शिवप्रकाश का नाम चर्चाओं में था। इन तमाम दिग्गजों की मौजूदगी में भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनिल बलूनी बाजी मारने में सफल रहे।

दरअसल, केंद्रीय नेतृत्व पर पकड़ और उत्तराखंड का होना बलूनी के पक्ष में गया। इसके अलावा उनकी छवि भी निर्विवाद रही है। रविवार देर शाम बलूनी देहरादून पहुंच गए और मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के साथ ही पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने बताया कि पार्टी हाईकमान ने राज्यसभा चुनाव के लिए अनिल बलूनी को प्रत्याशी बनाया है। बलूनी आज दोपहर को नामांकन पत्र दाखिल करेंगे।

पत्रकारिता से सक्रिय सियासत में कदम रखने वाले 46 वर्षीय अनिल बलूनी उन युवा नेताओं में हैं, जिन्होंने बहुत कम समय में राजनीति में अपना अलग मुकाम बनाया है। राज्यसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी बलूनी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का बेहद करीबी माना जाता है। वह उनकी कोर टीम के सदस्य भी हैं।

मूल रूप से पौड़ी गढ़वाल जिले के नकोट गांव (कोट ब्लाक) निवासी अनिल बलूनी जब दिल्ली में पत्रकारिता कर रहे थे, तभी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के करीब आए। धीरे-धीरे वह संघ में रच बस गए

इसी दरम्यान वह भाजपा के कद्दावर नेता सुंदर सिंह भंडारी के संपर्क में आए। भंडारी को जब बिहार का राज्यपाल बनाया गया तो वह उनके ओएसडी के रूप में पटना चले गए। बाद में भंडारी को गुजरात का राज्यपाल बनाया गया तो बलूनी भी उनके साथ गुजरात चले गए। जब वह गुजरात में थे, तभी वहां बतौर मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी का दौर शुरू हुआ।

इस दौरान वह संघ और भाजपा के कार्य से गुजरात में सक्रिय रहे। फिर कुछ समय बाद उत्तराखंड लौट आए। उत्तराखंड बनने के बाद 2002 में राज्य विधानसभा के पहले चुनाव में भाजपा ने उन्हें कोटद्वार सीट से प्रत्याशी बनाया। हालांकि, तब चुनावी राजनीति में उनके पहले कदम पर किस्मत ने साथ नहीं दिया और उनका नामांकन रद कर दिया गया।

हालांकि, बलूनी ने हार नहीं मानी और निर्वाचन आयोग के फैसले को अदालत में चुनौती दी। बाद में फैसला उनके पक्ष में गया और कोटद्वार सीट का निर्वाचन अवैध घोषित किया गया। कोटद्वार विधानसभा के वर्ष 2005 में हुए उपचुनाव में बलूनी फिर मैदान में उतरे लेकिन पराजित हो गए।

दूसरे विधानसभा चुनाव में भाजपा के जीत हासिल करने के बाद उन्हें वन एवं पर्यावरण अनुश्रवण समिति का उपाध्यक्ष बनाया गया। फिर वह दिल्ली चले गए और राष्ट्रीय सियासत में सक्रिय हो गए। 2014 में भाजपा केंद्र में सत्तासीन हुई तो बलूनी को भी अहम जिम्मेदारियां सौंपी गई। उन्हें पार्टी ने राष्ट्रीय प्रवक्ता और फिर नेशनल मीडिया कोर्डिनेटर की जिम्मेदारी दी गई।

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