ओम के उच्चारण से शरीर में होता है सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह

देहरादून। संवाददाता। नासा वैज्ञानिक व पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के वैज्ञानिक सलाहकार रहे डॉ. ओमप्रकाश पांडेय ने कहा विज्ञान में अब चेतनता पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है। ओम के उच्चारण से सकारात्मक ऊर्जा निकलती है।

नासा वैज्ञानिक डॉ. ओमप्रकाश पांडेय मूल रूप से उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद के निवासी हैं। वह गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय में प्राचीन भारत में विज्ञान एवं तकनीक विषय पर मैनेजमेंट स्टडीज विभाग के एमबीए हाल में संगोष्ठी को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा आज विज्ञान चेतन पर अधिक शोध की ओर उन्मुख है। भारत का शाब्दिक अर्थ हमें ऊर्जा देता है। भा का मतलब प्रकाश यानी सफेद रंग, र का मतलब रज यानि ज्योति व त का मतलब तमस है।

उनका कहना है कि हिमालयी क्षेत्र जैसे उत्तराखंड में वनस्पतियों पर सफेद रंग का प्रभाव होता है, क्योंकि यह देवभूमि है और यहां पर दैवीय ऊर्जा अधिक प्रभावी है। पुराणों में भारत का यही अर्थ है। ऊर्जा को मानव चेतना नियंत्रित करती है। विज्ञान में भी अंधकार होता है। विज्ञान का अंधविश्वास अधिक अहंकारी होता है। वेदों पुराणों में भी विज्ञान की प्रामाणिकता थी। बस अंतर यह है कि हम इसके वैज्ञानिक पक्ष तक नहीं पहुंच पाए।

डॉ. पांडेय ने कहा कि धर्म और विज्ञान एक दूसरे के सहगामी हैं। विज्ञान के फेर में अंधविश्वास पर जाने की जरुरत नहीं। हमें अपने वेद पुराणों की सीख को जीवन में अपनाना चाहिए। अजय मगर ने ऊर्जा का मानव जीवन से संबंध पर प्रकाश डाला। अध्यक्षता कर रहे उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रोफेसर महावीर अग्रवाल ने कहा विज्ञान व धर्म को उसकी प्रासंगिकता के हिसाब से ही अपनाने की जरुरत है। हमें अपनी संस्कृति व परंपरा को जीवंत रखना होगा।

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