खुलासाः हरिद्वार जेल में कैदियों को इस तरह मुहैया कराया जाता है फोन


हरिद्वार। रोशनाबाद जेल से मोबाइल फोन मिलने और कैदी का वीडियो वायरल होने के मामले में जांच पूरी हो गई है। 16 दिन चली जांच के बाद सोमवार को टीम ने अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप दी। रिपोर्ट के मुताबिक जेल में कैदियों को पांच हजार रुपये में मोबाइल उपलब्ध कराए जाते हैं।
मार्च माह की शुरुआत में हरिद्वार जेल में दो कैदियों के पास मोबाइल फोन मिलने और एक कैदी का वीडियो वायरल होने के बाद जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया था। मामला शासन तक पहुंचा तो प्रमुख सचिव (गृह) आनंदबर्द्धन ने 10 मार्च को इसकी जांच बैठा दी थी। जांच की कमान अपर महानिरीक्षक जेल तुलसीराम को सौंपी गई और उनके साथ हरिद्वार से अपर जिलाधिकारी (वित्त) ललित नारायणा मिश्र, मुख्य चिकित्साधिकारी अशोक गैरोला और एसपी सिटी ममता वोहरा को बतौर सदस्य नामित किया गया।
16 दिन तक चली जांच में कई बार टीम ने जेल में जाकर पूछताछ की। सीसीटीवी खंगाले और कई दस्तावेजों को कब्जे में लेकर जेल अधिकारियों, कर्मचारियों और बंदियों से पूछताछ की। सोमवार को जांच पूरी कर अपर महानिरीक्षक जेल तुलसीराम ने रिपोर्ट शासन को सौंपी। तुलसीराम के मुताबिक कैदियों के बयान में लिखा गया है कि मोबाइल फोन जेल के अंदर ही पांच हजार रुपये में उपलब्ध कराए जाते थे। अब जल्द ही जेल अधिकारियों पर कार्रवाई तय मानी जा रही है। एक कैदी की ओर से लगाए गए मारपीट के आरोप भी सच बताए जा रहे हैं।
बता दें कि हत्या के मामले में रोशनाबाद जेल में बंद सदर कॉलोनी मेरठ निवासी गैंगस्टर चांद मोहम्मद और हल्द्वानी जेल से हरिद्वार शिफ्ट किए गए कैदी गुरुविंद्र सिंह के पास मोबाइल फोन बरामद हुए थे। जबकि, गुरुविंद्र सिंह का ही वीडियो वायरल हुआ था। वीडियो में वह चोट के निशान दिखाते हुए न्याय की गुहार लगा रहा था। अपर महानिरीक्षक जेल तुलसीराम का कहना है कि कैदियों ने बयान में बताया है कि पैसे देकर जेल के अंदर मोबाइल फोन उपलब्ध कराए जाते हैं। कई अन्य खामियां भी मिली हैं। शासन को रिपोर्ट सौंप दी गई है।

मोबाइल फोन तोड़कर सीवर में फेंका
दो मोबाइल फोन मिलने के बाद अचानक जेल से कैदी का वीडियो वायरल हो गया था। इससे स्पष्ट है कि जेल में मोबाइल फोन चल रहे थे। लेकिन जिस मोबाइल से वीडियो बनाया गया वह जांच टीम को नहीं मिला। लेकिन मोबाइल का सिम टीम के हाथ लग गया। यह सिम संभल उत्तर प्रदेश से खरीदा गया था। पता चला कि मोबाइल तोड़कर सीवर में फेंक दिया गया था।

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