उप चुनाव के नतीजों से चिंता में भाजपा, वोट शियर 50 फीसद करने के उपायों पर मंथन शुरू

  • विपक्षी एकता की कवायद के बीच भाजपा अध्यक्ष अमित शाह बार-बार 50 फीसद वोट की तैयारी करने की बात कर रहे हैं।
  • 2014 के बाद से अधिकतर राज्यों में बूथ प्रबंधन और पन्ना प्रमुखों की रणनीति कामयाब दिखी थी। पिछले कुछ चुनावों में वह कमजोर दिख रही है।
  • जमीन तक पहुंचने के लिए भाजपा ने पहले ही केंद्र सरकार की सात योजनाओं को घर-घर पहुंचाने का बीड़ा उठाया है।
  • 22 करोड़ परिवारों के बीच भाजपा के लिए सद्भावना बढ़ाई जाएगी जो वंचित हैं 
  • अपने समर्थकों को भी समझाने की कोशिश होगी कि सरकार की नजरों से वह ओझल नहीं हुए हैं।
  • कार्यकर्ताओं से भी संवाद बढ़ेगा और कोशिश होगी कि जनाधार के साथ-साथ वोट फीसद में बड़ी छलांग लगाई जाए।

नई दिल्ली : गोरखपुर-फूलपुर के बाद कैराना में विपक्षी एकता के सामने पस्त भाजपा मंथन में जुट गई है। चौतरफा कवायद में जहां जनसंपर्क अभियान और तेज होगा, वहीं यह मानकर चला जा रहा है कि मतदान फीसद बढ़ाने के लिए बूथ प्रबंधन भी फोकस में होगा।

बीते गुरुवार को 10 विधानसभा और चार संसदीय सीटों पर हुए उपचुनाव के नतीजे भाजपा के लिए झटके से कम नहीं हैं। कर्नाटक में भाजपा बहुमत और सत्ता से चूक गई। उससे पहले राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के उपचुनाव परेशान करने वाले थे। गुरुवार को आए नतीजों में भी भाजपा तीन संसदीय और विधानसभा सीटें गंवा चुकी है। खासकर कैराना की हार ने विपक्षी एकता को बल दे दिया है।

हालांकि भाजपा अभी भी यह मानने को तैयार नहीं है कि प्रभावी विपक्षी एकजुटता आकार ले पाएगी, लेकिन यह भी स्पष्ट हो गया है कि आगामी लड़ाई के लिए विशेष प्रबंध करना होगा। गुरुवार को भी भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के बीच इस मुद्दे पर चर्चा हुई। सूत्र बताते हैं कि भाजपा नेतृत्व अपने समर्थकों में वोटिंग को लेकर उत्साह की कमी से चिंतित है।

मालूम हो कि कैराना में वोटिंग फीसद अच्छा नहीं रहा। लगभग छह दर्जन बूथों पर पुनर्मतदान के बावजूद वहां लगभग 62 फीसद ही मतदान हुआ। जाहिर है कि भाजपा के वोटर जमकर नहीं निकले। ध्यान रहे कि विपक्षी एकता की कवायद के बीच भाजपा अध्यक्ष अमित शाह बार-बार 50 फीसद वोट की तैयारी करने की बात कर रहे हैं। 2014 के बाद से अधिकतर राज्यों में बूथ प्रबंधन और पन्ना प्रमुखों की रणनीति कामयाब दिखी थी। पिछले कुछ चुनावों में वह कमजोर दिख रही है।

यही कारण है पिछले साल राजस्थान के संसदीय उपचुनाव में कुछ ऐसे बूथ भी दिखे थे जहां भाजपा को एक भी वोट नहीं मिला था। शाह नीचे के स्तर पर इन कमजोरियों को लेकर खासे नाराज बताए जा रहे हैं। यूं तो जमीन तक पहुंचने के लिए भाजपा ने पहले ही केंद्र सरकार की सात योजनाओं को घर-घर पहुंचाने का बीड़ा उठाया है। इसी बहाने उन 22 करोड़ परिवारों के बीच भाजपा के लिए सद्भावना बढ़ाई जाएगी जो वंचित हैं वहीं अपने समर्थकों को भी समझाने की कोशिश होगी कि सरकार की नजरों से वह ओझल नहीं हुए हैं। कार्यकर्ताओं से भी संवाद बढ़ेगा और कोशिश होगी कि जनाधार के साथ-साथ वोट फीसद में बड़ी छलांग लगाई जाए।

पालघर और गोंदिया-भंडारा ने दिए पार्टी को नए सबक

महाराष्ट्र की दो लोकसभा सीटों के उप चुनाव में एक पर मिली जीत के कारण यहां उत्तर प्रदेश जैसी किरकिरी होने से भले बच गई हो, लेकिन ये चुनाव 2019 के लिए भाजपा को कई नए सबक सिखा गए हैं। भाजपा ने मुंबई से सटी पालघर लोकसभा सीट 29,572 मतों से जीती और विदर्भ की भंडारा-गोंदिया सीट करीब 40,000 मतों से हार गई। भंडारा- गोंदिया राकांपा के दिग्गज नेता प्रफुल पटेल की परंपरागत सीट मानी जाती है। 2014 में प्रफुल पटेल प्रबल मोदी लहर के कारण यह सीट बड़े अंतर से हार गए थे, लेकिन भाजपा के टिकट पर जीते नाना पटोले ने कुछ माह पहले लोकसभा सदस्यता एवं भाजपा दोनों छोड़ दी। फलस्वरूप उप चुनाव हुए। इसमें राकांपा ने मधुकर कुकड़े को उम्मीदवार बनाया और कांग्रेस में शामिल हो चुके नाना पटोले ने भी उन्हें समर्थन दिया।

नतीजन भाजपा को हार का मुंह देखना पड़ा। पालघर की लड़ाई ज्यादा सुर्खियों में थी। यहां भाजपा सांसद चिंतामणि वनगा के निधन के कारण उप चुनाव हो रहा था। वनगा के पुत्र श्रीनिवास वनगा को टिकट भाजपा के बजाय शिव सेना ने दिया था। भाजपा के उम्मीदवार थे पिछला चुनाव कांग्रेस के टिकट पर हार चुके राजेंद्र गावित। स्थानीय दल के रूप में काफी मजबूत मानी जाने वाले बहुजन विकास आघाड़ी के साथ-साथ कांग्रेस भी मैदान में थी। कांटे की लड़ाई में यह सीट भाजपा 29,572 मतों से निकालने में कामयाब रही। शिवसेना दूसरे स्थान पर रही। गौर करें, तो इस चुनाव में सर्वाधिक नुकसान कांग्रेस को ही हुआ है। भंडारा- गोंदिया में वह सिर्फ राकांपा के समर्थक दल की भूमिका में रही और पालघर में वह पांचवें स्थान पर जा गिरी। भाजपा के सामने मुख्य विपक्ष बनकर उभरी शिवसेना।

You May Also Like

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *