कांग्रेस में हार के बाद भी जारी भीतरी कलह


देहरादून। संवाददाता। विधानसभा चुनाव के बाद प्रदेश कांग्रेस में शुरू हुई अंदरूनी कलह रुकने का नाम नहीं ले रही है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हाल ही में प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने बयान जारी किया था कि कांग्रेस से बगावत करने वाले पुराने साथियों के लिए दरवाजे बंद नही हुए हैं अगर वह घर वापसी करना चाहते हंै तो उनका स्वागत है। प्रदेश अध्यक्ष के इस बयान पर कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने असहमति जताते हुए कहा कि जिन लोगों को अनुशासन हीनता के चलते विधानसभा सभा चुनाव के दौरान बाहर का रास्ता दिखाया था, वह फैसला पीसीसी को विश्वास में रख कर लिया गया था। इसलिए किसी एक व्यक्ति के कहने से पीसीसी के फैसले को नहीं बदला जा सकता। उन्होंने कहा कि उनका मानना है कि इस तरह के फैसले को प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सामने में रख ही उचित फैसला लिया जाना चाहिए।

हालांकि बयान पर असहमति जताते हुए उन्होंने तर्क दिया कि बगावत करने वालों लोगों की वजह से पार्टी के कई प्रत्याशियों को हार का सामना करना पड़ा था। बागियों के वापसी के फैसले से निष्ठावान कार्यकर्ताओं की भावना आहत हो सकती है, जिससे संगठन को नुकसान हो सकता है।

प्रदेश अध्यक्ष के बयान पर असहमति व्यक्त करने के बाद एक बार फिर राजनीतिक गलियारों में अटकलें लगाई जा रही हंै कि प्रदेश कांग्रेस में सब सही नहीं चल रहा है। हालांकि प्रदेश हाई कमान का मानना है कि पार्टी में अंदरूनी कोई कलह नहीं है लेकिन समय-समय पर अंदरूनी कलह को उस वक्त हवा मिल जाती है, जब प्रदेश कांग्रेस के पुराने धुरंधर अलग-अलग अलाप रटते दिखते हैं। दरअसल अंदरूनी खींचतान और कलह की मुख्य वजह विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मिली करारी हार को माना जा रहा है।

इस हार के बाद ही पार्टी ने संघठन में फेरबदल करते हुए पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय की जगह प्रदेश अध्यक्ष के पद पर प्रीतम सिंह की ताजपोशी की थी। यहीं से पार्टी में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष की उपेक्षा शुरू हो गयी थी। जिसके चलते पार्टी में अंदरूनी कलह बाहर दिखने लगी। हांलाकि थराली उपचुनाव के दौरान दिग्गजों ने एकजुट होने की कोशिस की थी लेकिन उपचुनाव में मिली हार के बाद स्थिति पहले जैसे हो गई। दिग्गजों की आपसी खींचतान का नजारा उस समय भी दिखाई दिया, जब पूर्व सीएम हरीश रावत की काफल पार्टी पर पूर्व वित्तमंत्री इंदिरा हृदेश ने टिप्पणी की थी। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती निकाय चुनाव से पहले पुराने दिग्गजों को एकजुट करने की है। क्योंकि थराली उपचुनाव की पहली परीक्षा में प्रदेश अध्यक्ष नजदीकी अंतर से असफल हो गए। लेकिन निकाय चुनाव में पार्टी को जीत का स्वाद चखना है तो एकला चलो की बजाय दिग्गजों को एकजुट करना ही पड़ेगा।

You May Also Like

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *