नाम मात्र का साबित हो रहा पेयजल निगम

बरसात सिर पर मगर पानी की शुद्धी का नहीं कोई उपाय
शहरभर में बिना फिल्टर का पानी पीने योग्य नहीं


देहरादून। आशीष बडोला। राजधानी दून सहित प्रदेश में पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है। मगर पेयजल निगम के शीर्ष अधिकारी चुप्पी साधे बैठे हंै। हालात इतने खराब हैं कि कई क्षेत्रों की शिकायत जाने के बावजूद भी विभाग जलापूर्ति करने को तैयार नहीं है। वास्तव में ऐसी कौन सी मजबूरी है, जिसें विभाग बयंा नहीं कर सकता। वहीं ये बात भी सामने आ रही है कि विभाग द्वारा दून के किसी भी हस्सें में पीने का पानी मुहैया कराने में असफल साबित हुआ है।

कुछ दिनों पहले एक संस्था द्वारा पीने के पानी की वर्तमान स्थिति के आंकड़ों को सार्वजनिक किया गया था। जिससें साफ हुआ कि शहर के कई क्षेत्रों में पानी का टीडीएस जरूरत से ज्यादा है। टीडीएस का उचित मानक 300 एमजी माना जाता है। वहीं कुछ स्थानों में क्लोंिरन की अधिकता पाई गई है। केवल दो स्थान चंदर नगर और नई बस्ती ही ऐसे क्षेत्र हैं जहां क्लोरिन का स्तर 0.2 सही मिला है। जबकी अधिकतर स्थानों में पेयजल में घुलनशील काॅलीफार्म की मात्रा भी काफी ज्यादा मिली है। पीने के पानी में काॅलीफर्म 100मिली. होना चाहिए। ऐसे में साफ होता है कि एक ओर पेयजल निगम पीने का पानी मुहैया नहीं कर पा रहा है। दूसरी ओर जिन स्थानों पर पीने का पानी मिल रहा है, उस पानी में घुलनशील तत्वों की मात्रा अधिक है। जिससें वहां का पानी पीने योग्य नहीं है।

संस्था द्वारा जारी रिपोर्ट में ये बात भी साफ हो चुकी है कि जिस पानी को दून के लोग पी रहे है। उससे हैजा, पीलीय, त्वाचा रोग, बालों के रोग जैसी जटिल समस्याआंे का सामना करना पड़ सकता है। रिपोर्ट में पता लगा है कि पानी में टीडीएस अधिक होने पर त्वचा में झुर्रिया, दिल का दौरा पड़ने की संभावना बढ़ जाती हैं। इस तरह के जल से कैंसर का खतरा अधिकत होता है। इसके अलावा पीने के पानी का टीडीएस अधिक होने पर रक्तचाप बढ़ना, भूख न लगना, एसीडिटी, पथरी, मधुमेह और एल्जाइमर जैसे रोगों के होने भय बना रहता है। वहीं ये बात भी सामने आई है कि जिस पेयजल में काॅलीफार्म की मात्रा ज्यादा होती है ऐसे पानी का सेवन करने वाले लोगों में पेट की बीमारी, डायरिया, कान व नाक के इंफेक्शन, गैस्ट्रो, पेट में कीड़े, हैपोटाइटिस, पीलिया जैसे घातक रोगों से पीड़ित होते हैं।

बरसात के लिए कुछ तैयारी नहीं
बरसात शुरू होते ही दून शहर का पानी मटमैला व कालेरंग मंे रंग मंे बदल जाता है। जबकी विभाग के पास पानी फिल्टर करने के उपयुक्त साधन हैं। इसके बावजूद भी शहर के लोग कई सालों से बरसात में गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। जब डीएल रोड स्थित पेयजल निगम के अधीशासी अभियंता मनीष सेमवाल से इस बारे में पूछा गया तो उनका कहना है कि बरसात के लिए तैयारी चल रही है। इसके बाद उन्होंने शीर्ष अधिकारियों से बात करने की राॅय दी। वहीं विभाग के अधीक्षण अभियंता डीएस सुबोध का कहना है कि शहर में अधिकतर जगह टयूवैल का पानी आता है। नदियों के पानी को साफ करने के के लिए अधिकतर स्थानों पर ट्रीटमंेट प्लांट लगाए गए हैं। पीने के पानी में टीडीएस तीन सौ से अधिक भी हो सकता है।

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