आरएसएस की राह पर चलने का कांगे्रस का प्रयास


देहरादून। संवाददाता। भारतीय जनता पार्टी से निपटने के लिए कांग्रेस ने साम, दाम, दंड, भेद की नीति पर काम करना शुरु कर दिया है। इसी के तहत कांग्रेस ने अपने सेवा दल की ड्रेस में बदलाव करने की घोषणा कर दी है। कांग्रेस को लगता है कि उसके इस बदलाव का पार्टी में शामिल होने के लिए युवाओं पर काफी असर पड़ेगा और भारी संख्या में कांग्रेस की सदस्यता में इजाफा होगा। लेकिन उस सोच का क्या होगा जो आरएसएस ने कमाई और बनाई है। क्या उसी तर्ज पर कांग्रेस को इससे लाभ मिल सकेगा। क्या सेवा दल भी अपनी पहचान बनाने में कामयाब हो सकेगा। इस निर्मय के साथ ऐसे कई सवाल भी खड़े हो गए हैं।

आरएसएस ने कुछ समय पहले वर्षों पुरानी अपनी ड्रेस खाकी नेकर को बदलने का फैसला ले लिया था, जिसके स्थान पर अब खाकी पेंट आ गई है। लेकिन अपनी नीतियों और संस्कारों में कोई बदलाव नहीं किया था। उसी तर्ज पर कांग्रेस ने भी अपने सेवादल की सफेद वर्दी को बदलने का फैसला ले लिया है। इससे पता चलता है कि कांग्रेस के रणनीतिकार भाजपा और आरएसएस के हर उस फैसले की स्कैनिंग कर रहे हैं, जिनका फायदा भाजपा को चुनाव में हो सकता है। इसी के चलते कांग्रेस में अब सफेद कमीज, सफेद पेंट और सफेद ही टोपी को बदल दिया गया है। उसकी जगह नीली जींस, सफेद कमीज और नीली टोपी ने ले ली है।

रहा सवाल सैल्यूट का तो वह भी सिर्फ खास मौकों पर ही दी जाएगी। हर कार्यक्रम में सैल्यूट की परंपरा को खत्म कर दिया गया है। एक बात यह भी महत्वपूर्ण है कि केवल जींस पहना देने से क्या युवा भारी संख्या में कांग्रेस में शामिल हो जाएंगे। अगर ऐसा ही होना होता तो पूरे देश में सेवादल की संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही होती लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसलिए जरूरी है कि कांग्रेस को इस बात का भी ध्यान रखना होगा कि पार्टी के प्रति प्रतिबद्धता किस तरह से कार्यकर्ताओं में लाई जाए। ड्रेस बदलने के साथ-साथ कुछ नीतियों को भी बदलने की जरूरत होगी। विशेषकर जनता के बीच में कैसे अपना विश्वास बनाया जाए। कैसे भरोसा दिलाया जाए कि उनके तारणहार की मुख्य भूमिका निभाने में कांग्रेस पर यदि भरोसा किया जाए तो वह कायम रहेगा।

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