वैश्य नर्सिंग होम में बच्ची बदलने के मामले ने तूल पकड़ा


देहरादून। संवाददाता। अस्पताल में जिंदा बच्ची को लाश से बदलने और इस लाश को कब्र से गायब कराने के आरोपों से घिरे वैश्य नर्सिंग होम ने पुलिस को तीन दिन की सीसीटीवी फुटेज सौंप दी है। फिलहाल पुलिस यह फुटेज देख नहीं पाई है। इस फुटेज के अलावा तपोवन क्षेत्र के उस स्थान के आसपास के सीसीटीवी फुटेज को भी खंगाला जा रहा है जहां शव को दफनाया गया था।

परिजनों को पहली बार तब अस्पताल पर शक हुआ था जब पहले दिन की रिपोर्ट में एडमिट कराए गए बच्चे को फिमेल और डिस्चार्ज रिपोर्ट में मेल बताया गया। उधर कब्र से शव गायब होने के बाद परिजनों की डीएनए टैस्ट की आस भी टूट गई है। विजय पार्क एक्सटेंशन में रहने वाले गौरव आहूजा का अनुसार आठ जुलाई को उनकी पत्नी ने एक निजी अस्पताल में बेटी को जन्म दिया। बच्ची की तबियत खराब होने पर उन्होंने उसे वैश्य नर्सिंग होम में भर्ती करवाया।

अगले दिन अस्पताल प्रशासन ने गौरव को बताया कि उनकी बच्ची की मौत हो गई है। इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने गौरव से सफेद कपड़ा मंगवाया और बच्ची के शव को कपड़े में लपेट कर गौरव को सौंप दिया। गौरव ने बच्ची को देखने की बात कही परन्तु अस्पताल प्रशासन ने गौरव को बच्ची का चेहरा नहीं देखने दिया। इसी दौरान वैश्य र्निसंग होम के सफाई कर्मचारी ने गौरव को मदद की बात कही और वे दोनों बच्ची के शव को तपोवन क्षेत्र में गड्ढे में दफना आए।

घर आकर गौरव ने बच्ची को एडमिट करने और डिस्चार्ज करने की मेडिकल रिपोर्ट देखी तो उसके होश उड़ गए। मेडिकल रिपोर्ट में भर्ती कराए गए बच्चे को फिमेल और डिस्चार्ज कराए गए बच्चे को मेल बताया गया था। रिपोर्ट को देखकर गौरव को वैश्य र्नंसिंग होम पर संदेह हुआ कि अस्पताल प्रशासन ने उनकी बच्ची को किसी और को बेच दिया और उसके बदले उन्हें बच्चे का शव थमा दिया। इसे लेकर गौरव और उसके परिजनों ने अस्पताल में हंगामा किया और पुलिस को सूचना दी।

उधर बच्ची का डीएनए टैस्ट करवाए जाने से स्थिति स्पष्ट हो सकती थी, परन्तु जब गौरव अगले दिन बच्ची की कब्र पर दूछ चढ़ाने गए तो देखा कि कब्र खुदी हुई थी और उसमें से शव गायब था। इसके बाद उनका शक अस्पताल प्रशासन पर और बढ़ गया। उन्होंने आरोप लगाया कि बच्ची बदलने वाले अस्पताल प्रशासन ने ही कब्र से शव भी गायब करवाया है ताकि शव का डीएनए टैस्ट न हो सके। उधर इस मामले में वैश्य नर्सिंग होम के प्रबंधक नयाराम का कहना है कि मेडिकल दस्तावेजों में लिपिकीय त्रुटि हुई है। बच्ची बदलने का आरोप बेबुनियाद है। कब्र से शव गायब होने से अस्पताल प्रशासन का काई लेना देना नहीं।

मामले में दोनों पक्षों ने एक दूसरे के खिलाफ पुलिस को तहरीर दी है। जिस पर जांच चल रही है। मामले में नालापानी चैकी इंचार्ज रफत अली ने बताया कि वैश्य र्निसंग होम ने अस्पताल में लगे सीसीटीवी कैमरे की तीन दिन की फुटेज सौंपी दी है। जिसे देखना अभी बाकी है। उधर कब्र से शव गायब करने वाले की तलाश में वहां आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को भी खंगाला जा रहा है।

गौरव के संदेह के आधार
1- मेल और फिमेल जैसी लिपिकीय त्रुटि होना इतनी आसानी से संभव नहीं।
2- जब बच्ची की लाश उन्हें सौंपी गई तो शव का चेहरा क्यों नहीं देखने
दिया। क्या अस्पताल प्रशासन किसी को भी शव का चेहरा नहीं दिखाता।
3- मांगने पर भी उन्हें सीसीटीवी फुटेज क्यों नहीं दिखाई दी।
4- सफाई कर्मचारी ने बिना मांगे बच्ची को जल्दबाजी में दफनाने में उनकी
मदद क्यों की।
5- क्या हर शव को दफनाने में सफाई कर्मचारी लोगों के साथ जाते हैं।
6- डीएनए टैस्ट से बच्ची का राज खुलने की बात पर अचानक कब्र से शव कैसे
गायब हो गया।

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