बस्तियों को हटाने के विरोध में उतरी कांग्रेस


देहरादून। संवादाता। हाईकोर्ट के आदेश के बाद राजधानी में अतिक्रण हटाओ अभियान चल रहा है। वहीं रिस्पना और बिंदाल किनारे अतिक्रमण की जद में आने वाली बस्तियों के लोगों में भी उजड़ने का डर बना है। लेकिा बस्ती वासियों के साथ जहां सरकार के विधायक भी खुलकर सामने आ गए हैं तो कांग्रेस भी दमखम के साथ खड़ी हो गई है। सोमवार को कांग्रेस के पूर्व विधायक राजकुमार के नेतृत्व में बस्तियों के लोगों ने नगर निगम में अतिक्रमण के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया।

नगर निगम परिसर में प्रशासन की ओर से वहां एहतिहातन पुलिस बल को भी तैनात किया गया था। समर्थकों ने राजकुमार को कंधे पर उठाकर वहां भाजपा सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अतिक्रमण अभियान का विरोध किया। इस दौरान पूर्व विधायक राजकुमार ने कहा अकेले देहरादून शहर में 129 मलिन बस्तियां हैं, जबकि प्रदेश में 582 मलिन बस्तियां हैं, जो नगर पालिका, नगर निगम से सूचीबद्ध तथा मान्यता प्राप्त हैं। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने अपने कार्यकाल के दौरान मलिन बस्तीयों के सुधार, विनियमितीकरण, पुनव्र्यस्थापना विधेयक 2016 में पारित किया था, जिसको पांच अगस्त 2016 राज्यपाल ने भी अपनी स्वीकृति प्रदान की थी।

इसके तहत पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने मलिन बस्ती वासियों को मालिकाना हक देना शुरू कर दिया था। मलिन बस्तियों के रख रखाव के लिए 400 करोड़ प्रावधान भी किया गया था। मलिन बस्तियों में आधारभूत जनसुविधा उपलब्ध कराने हेतु विभागों से निर्माण कार्य भी करवाए गए हैं। इन बस्तियों को तोड़ना जनहित में उचित नहीं होगा। इसमें कोई कार्रवाई होती है, तो लाखों लोग बेघर हो जाएंगे। जिन मलिन बस्तियों को अतिक्रमण के तहत हटाने के लिए नोटिस दिया गया है, उसे तत्काल निरस्त किया जाए। साथ ही मलिन बस्तियों को हटाने की कार्रवाई को तत्काल विराम दिया जाए। ऐसा नहीं होता है तो सभी मलिन बस्ती के लोग सड़कों पर उतरने को मजबूर हो जाएंगे। राजकुमार ने 2016 में मलिन बस्तियों के विनियमितीकरण को लेकर बने कानून को लागू करने की मांग की है। उन्होंने इस संबंध में नगर आयुक्त और डीएम के नाम ज्ञापन प्रेषित किया। इस दौरान जहीर अहमद, गोपाल, मनीष, मीना बिष्ट, चंदू लाल, अरविंद, प्रवीण, राकेश कुमार आदि शामिल रहे।

विधायकों ने भी की घेराबंदी-
शहर में चल रहे अतिक्रमण अभियान को रोकने के लिए भी भाजपा और कांग्रेस दोनों के विधायकों और नेताओं ने घेराबंदी कर सरकार पर दवाब बनाना शुरू कर दिया है। पिछले दिनों प्रेमनगर बाजार में जब प्रशासन ने अतिक्रमण हटाना चाहा तो वहां गणेश जोशी, उमेश शर्मा काऊ, हरवंश कपूर, सूर्याकांत धस्माना जैसे कई दिग्गज पहुंच गए। जबकि पूर्व विधायक राजकुमार पहले ही अतिक्रमण के खिलाफ मलिन बस्ति वासियों के नेता बने हुए हैं। इसमें दो दिन पहले निर्वमान मेयर व विधायक विनोद चमोली का भी बयान सामने आया है। उन्होंने भाजपा की कार्यसमिति की बैठक में स्पष्ट कहा है कि आप किस आधार पर इतनी बड़ी आबादी को बेघर कर देंगे। उन्होंने कहा कि बस्तियों को बचाने के लिए स्पष्ट नीति बनाए जाने की जरूरत है।

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