ड्रोन तकनीक से जमीनों का सर्वे व भूमि बंदोबस्त : राजस्व परिषद व सर्वे ऑफ इंडिया ने हरभजवाला में किया ट्रायल

  • ट्रायल सफल होने पर  चरणबद्ध तरीके से राज्य में होगा सर्वे
  • प्रदेश में पांच दशक पहले हुआ था अंतिम भूमि बंदोबस्त
  • इस तकनीक से सर्वे करने पर राजस्व अभिलेखों में दर्ज भूमि का एक त्रुटिरहित डिजिटल लैंड प्राप्त होगा

देहरादून : डिजिटल इंडिया लैंड रिकार्ड मार्डनाइजेशन प्रोग्राम के तहत प्रदेश के भू-अभिलेखों का आधुनिक तकनीक (ड्रोन) के माध्यम से सर्वे किया जाएगा। यह बात बुधवार को राजस्व परिषद के अध्यक्ष एस रामास्वामी ने हरभजवाला में राजस्व परिषद उत्तराखंड और सर्वे ऑफ इंडिया के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित नवीन ड्रोन तकनीक से ट्रायल के तौर पर सर्वे व बंदोबस्त की कार्यवाही प्रारम्भ करते हुए कही।

उन्होंने कहा कि ट्रायल सफल होने पर इसे पूरे राज्य में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा ताकि पूरे राज्य में सर्वे कराने के लिए मॉडल विकसित किया जा सके। इस अवसर पर राजस्व विभाग के सर्वे एवं चकबंदी इकाइयों के कार्मिकों को सर्वे ऑफ इंडिया के माध्यम से निशुल्क प्रशिक्षण दिया गया है। राजस्व परिषद के अध्यक्ष ने कहा कि इस तकनीक से सर्वे करने पर राजस्व अभिलेखों में दर्ज भूमि का एक त्रुटिरहित डिजिटल लैंड प्राप्त होगा।

इससे भविष्य में आवश्यकतानुसार सभी कार्यों को आसानी व सटीक तरीके से किया जाना संभव हो पायेगा। इससे भूमि विवाद में कमी आएगी। क्रयकर्ता को भूमि की पूरी जानकारी स्वत: उपलब्ध हो सकेगी और मूल भूमि की वस्तुस्थिति का अपडेटेशन होने से धोखाधड़ी से बचा जा सकेगा। राजस्व सचिव विनोद प्रसाद रतूड़ी ने कहा कि प्रदेश में हुए अंतिम बंदोबस्त प्रक्रिया को लम्बा समय (लगभग 52 वर्ष) हो चुके हैं, जिससे विद्यमान कैडस्ट्रल मैटस (खसरा) अत्यंत पुराने हो चुके हैं और वर्तमान परिदृय में धरातल पर आमजन को भूमि एवं संपत्ति विवादों के दायरे को कम करने, भूमि रिकार्ड रखरखाव पण्राली मे पारदर्शिता बढाने और भू-संपत्तियों के लिए निर्णायक अधिकार व टाइटल की गारंटी प्रदान करने हेतु आधुनिक तकनीक युग में पर्याप्त नही हैं। ऐसे में आधुनिक तकनीक से भूमि का पुन: सर्वे कराया जाना आवश्यक है। 

देहरादून जनपद के जिलाधिकारी एसए मुरुगेशन ने कहा कि अंतिम भूमि सर्वे में लंबा समय व्यतीत होने के चलते भूमि अधिग्रहण, खातेदारों में भूमि विभाजन, भूमि के वर्तमान स्वरूप के विक्रय, भूमि खरीदारी की ओर रूझान, कृषि भूमि का लैंड यूज परिवर्तन हो गया है। ड्रोन सर्वे से भूमि सर्वेक्षण कम समय में त्रुटिरहित व वास्तविक डाटा उपलब्ध हो सकेगा जिससे सरकार के पास विभिन्न उद्देश्य के लिए एक सुरक्षित भू-डाटा बैंक भी स्पष्ट हो सकेगा।

सर्वे ऑफ इंडिया के निदेशक ले. कर्नल पवन कुमार पांडेय ने कहा कि सर्वे ऑफ इण्डिया द्वारा राजस्व विभाग उत्तराखंड के लिए आवश्यक सभी भू-सर्वेक्षण की आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षण संबंधी जरूरतों को पूरा किया जायेगा। आधुनिक विधियों से सर्वेक्षण तकनीक करवाये जाने से भू-प्रबंधन में बहुत लाभ होगा और राजस्व विभाग के लेखपाल, कानूनगो आदि कार्मिकों को समय-समय पर प्रशिक्षण व मार्गदर्शन में सहायता प्रदान की जायेगी। इस दौरान हरभजवाला में स्कूली छात्रों ने ड्रोन के द्वारा सर्वेक्षण कार्य को बड़ी उत्सुकता से देखा और उपस्थित अधिकारियों से ड्रोन व भू-सर्वेक्षण के बारे में प्रश्न किये। राजस्व आयुक्त बीएम मिश्र, आरएस मीणा, अपर जिलाधिकारी अरविंद पांडेय, सिटी मजिस्ट्रेट मनुज गोयल, पंकज मिश्रा, सुंदरलाल सेमवाल आदि थे।

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