बन कर तैयार है रणनीतिक महत्व का चाबहार बंदरगाह! 

 

नई दिल्ली : ईरान के दक्षिणी तट पर स्थित रणनीतिक महत्व के चाबहार बंदरगाह अब बन कर तैयार है। ओमान की खाड़ी के इस बंदरगाह की मदद से भारत अब पाकिस्तान का रास्ता बचा कर ईरान और अफगानिस्तान के साथ एक आसान और नया व्यापारिक मार्ग अपना रहा है। ईरान के दक्षिणी तट पर सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत तट का यह बंदरगाह भारत के पश्चिमी तट से नजदीक है और आसानी से संपर्क के योग्य है।

इसे पाकिस्तान में चीनी निवेश से बन रहे गवादर बंदरगाह का जवाब माना जा रहा है। पाकिस्तान का गवादर बंदरगाह चाबहार से महज 80 किलोमीटर पश्चिम में है। भारत व्यापार के लिए भरोसेमंद और वैकल्पिक मार्ग बनाने के लिए ईरान और अफगानिस्तान के साथ मिलकर लम्बे समय से काम कर रहा था।

इस बंदरगाह के जरिये भारत अफगानिस्तान को सफलतापूर्वक गेहूं भेज चूका है। भारत ने अफगानिस्तान को 1.10 लाख टन गेहूं से भरा पहला जहाज पिछले बर्ष इसी बंदरगाह के रास्ते भेजा था।

पिछले साल मई में ईरान के साथ हुए एक करार के तहत भारत ने 10 साल के पट्टे पर इस बंदरगाह में  852.10 लाख डॉलर के निवेश एवं 229.5 लाख डॉलर के सालाना राजस्व खर्च के साथ प्रथम चरण में दोनों गोदियों को माल चढ़ाने उतारने के यंत्र उपकरणों एवं सुविधाओं से लैस करने तथा उनके परिचालन की जिम्मेदारी ली थी, जो पूर्ण हो चुकी है।

इस विस्तार से इस बंदरगाह की क्षमता तीन गुना बढ़ गई और यह पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में निर्माणाधीन गवादर बंदरगाह के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।

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