उद्योग के लिए पहाड़ पर जमीन लेना हुआ आसान


देहरादून। पहाड़ों पर उद्योग लगाने को उद्यमियों के सामने अब जमीन की कमी आड़े नहीं आएगी। इसके लिए सरकार शुक्रवार को हुई कैबिनेट में अध्यादेश ले आई। कैबिनेट ने पहाड़ों पर उद्योगों की राह आसान करने के लिए कई बड़ी घोषणाएं कीं। इनमें सबसे अहम घोषणा करते हुए सरकारी प्रवक्ता मदन कौशिक ने बताया कि सरकार ने उत्तर प्रदेश जमींदारी उन्मूलन एवं भूमि व्यवस्था 1950 (अनुकूलन एवं उपान्तरण) संशोधन 2018 को मंजूरी दे दी है। अब पहाड़ों पर उद्योग लगाने को उत्तराखंड से बाहर के उद्योगपति भी 12.5 एकड़ से ज्यादा भूमि खरीद सकेंगे। साथ ही उन्हें भूमि खरीद और भूउपयोग परिवर्तन के लिए 143 की जटिल प्रक्रिया से भी नहीं गुजरना होगा। उन्हें सिर्फ जिलाधिकारी को सूचना देकर बताना होगा कि भूमि औद्योगिक प्रयोजन के लिए खरीदी जा रही है।

इसके बाद भूउपयोग परिवर्तन की मंजूरी मिल जाएगी। 143 की प्रक्रिया भी संशोधित की गई है। अब राज्य के लोग भी अपनी कृषि भूमि पर औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियां संचालित कर सकेंगे। उन्हें भी सीधे भूउपयोग परिवर्तन की मंजूरी मिलेगी। छूट सिर्फ पहाड़-गांव में हालांकि ये संशोधन विशुद्ध रूप से पहाड़ी और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए हैं। नगर निगम, नगर पंचायत, नगर पालिका परिषद और कैंट क्षेत्रों में ये लाभ नहीं मिलेंगे। देहरादून में विकासनगर, सहसपुर, डोईवाला और रायपुर ब्लॉक क्षेत्रों में ये राहत नहीं मिलेगी। नैनीताल में हल्द्वानी और रामनगर क्षेत्र में भी ये राहत लागू नहीं होगी। ऊधमसिंहनगर और हरिद्वार में कोई लाभ नहीं मिलेगा। शेष पूरे प्रदेश में इस संशोधन का लाभ उत्तराखंड और राज्य से बाहर के लोगों को मिलेगा।

क्या है धारा 143
ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि भूमि को अकृषि कार्यों के लिए इस्तेमाल किए जाने को लेकर एसडीएम न्यायालय में वाद दायर किया जाता है। इस पर तहसीलदार, पटवारी की रिपोर्ट लगने के साथ ही थका और परेशान कर देने वाली सुनवाई प्रक्रिया चलती है। अब इससे राहत मिलेगी।

गड़बड़ी पर जमीन जब्त
इस बड़ी छूट का लाभ लोगों को भले ही मिलेगा, लेकिन यदि किसी भी स्तर पर कोई गड़बड़ी की गई, तो सख्त कार्रवाई के भी प्रावधान भी किए गए हैं। मसलन यदि किसी व्यक्ति ने औद्योगिक प्रायोजन के नाम पर जमीन खरीदी और तय समय सीमा के भीतर उद्योग या रोजगारपरक दूसरी व्यवसायिक, कारोबारी गतिविधियां संचालित नहीं की तो, जमीन सीधे सरकार में निहित हो जाएगी।

सरकार का ये फैसला पहाड़ की तस्वीर बदल देगा। इसके जरिए सरकार ने तमाम जटिलताएं एक झटके में दूरकर, पहाड़ के लिए विकास के दरवाजे खोल दिए हैं। अब पहाड़ों पर औद्योगिक व कारोबारी गतिविधियां आसानी से संचालित हो सकेंगी। इससे पलायन दूर होगा। लोगों को पहाड़ पर ही रोजगार उपलब्ध होंगे।
मदन कौशिक, सरकारी प्रवक्ता

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