विदेशी फूलों की खेती से राजीव कुमार लाखों कमा रहे हैं; क्षेत्र के युवाओं के बने प्रेरणा स्त्रोत

हॉलैंड से एसियेटिक का एक बीज 12 से 13 व ओरिएंटल का 22 से 24 रुपये का एक बल्ब (बीज) आया। पॉलीहाउस में करीब 40 हजार बल्ब लगाए गए। एसियेटिक की स्टीक दो माह में तथा ओरिएंटल की स्टिक तीन माह में तैयार हो गई। जिसको तैयार करने में करीब 11 से 12 लाख का खर्च आया। इस तीन में इन स्टिक को बेचने में करीब तीन माह में तीन लाख का लाभ मिला।

चम्पावत : चम्‍पावत जिले के देवीधुरा वालिक निवासी राजीव कुमार ने रोजगार के लिए औरों की तरह महानगरों का रुख करने की जगह कुछ अपना करने की सोची। उसका कमकसद था कि घर पर अपनों के बीच रहकर कुछ नया किया जाए। ऐसे में खेती का विकल्‍प उसके सामने था, लेकिन परंपरागत खेती? सोचकर ही डर लगता है। फिर उसने इंटरनेट पर सर्च किया और हालैंड के फूल लिलियम और कॉर्नेशन की खेती करने की ठानी। इस फूल का बीज जितना कीमती है उसके पुष्प उससे ज्यादा महंगे दामों पर देश विदेश में बिकते हैं। राजीव ने पॉली हाउस लगाकर इस बार पुष्प की एक फसल बेच कर काफी आमदनी की है। इनको देखकर अब क्षेत्र के अन्य लोग भी पुष्प उत्पादन की ओर रुख करने जा रहे हैं।

दस साल तक दिल्‍ली में की नौकरी

देवीधुरा वालिक निवासी सुदामा सिंह के पुत्र राजीव कुमार ने स्नातक साइंस वर्ग से पूरी की। वह मूलरूप से गाजीपुर उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। पिता एयर फोर्स में होने के चलते सालों पूर्व वह जनपद में आकर बस गए। उच्च शिक्षा पूरा करने के बाद वह दिल्ली नौकरी करने में चले गए। करीब दस साल नौकरी करने बाद वह 2015 में गांव वापस आ गए। उसके बाद कृषि में ही कुछ अच्छा व नया करने का निर्णय लिया। जिसके बाद उन्होंने पारंपरिक खेती करने के बजाय कॉमर्शियल खेती करने की तैयारी की। इंटरनेट पर सर्च करने के बाद पदमपुरी में जमीन लीज पर लेकर लिली फूल की खेती से शुरुआत की।

उद्दान विभाग से ली मदद, पॉलीहाउस का कराया निर्माण

एसबीआइ पाटी से लोन के लिए आवेदन किया था लेकिन बैंक ने आपदा का हवाला देते हुए लोन देने से मना कर दिया। जिसके बाद उन्होंने उद्यान विभाग से संपर्क कर योजना के तहत 22 लाख की लागत से दो हजार वर्ग मीटर का पॉलीहाउस का निर्माण कराया। जिसमें उन्हें क्रमश: 50 व 30 फीसद सब्सिडी दी गई। जिसमें उन्होंने हॉलैंड से लिलियम की दो प्रजाति एसियेटि व ओरिएंटल के माह जून-जुलाई में बीज लगाए। जिनका उत्पादन काफी अच्छा रहा।

तीन माह में तीन लाख का मुनाफा

राजीव ने बताया कि हॉलैंड से एसियेटिक का एक बीज 12 से 13 व ओरिएंटल का 22 से 24 रुपये का एक बल्ब (बीज) आया। पॉलीहाउस में करीब 40 हजार बल्ब लगाए गए। एसियेटिक की स्टीक दो माह में तथा ओरिएंटल की स्टिक तीन माह में तैयार हो गई। जिसको तैयार करने में करीब 11 से 12 लाख का खर्च आया। इस तीन में इन स्टिक को बेचने में करीब तीन माह में तीन लाख का लाभ मिला।

दिल्ली की गाजीपुर फूल मंडी में बेचे स्टिक

राजीव ने बताया कि लिलियम की स्टिक बाजार में काफी महंगी बिकती है। एसियेटिक की एक स्टिक 20 से 25 तथा ओरिएंटल की एक स्टिक 50 से 60 रुपये में बिकती है। पहली कटिंग करने के बाद इसे दिल्ली की गाजीपुर फूल की थोक मंडी में बेचा गया। यहां से यह स्टिक विदेशों तक सप्लाई की जाती है। इसके अलावा जयपुर मुंबई में भी भारी मात्रा में यह पुष्प बेचा जाता है।

लोगों को कर रहे हैं जागरूक

राजीव बताते हैं कि वह लिलियम के अच्छे उत्पादन से काफी खुश हैं। उद्यान विभाग ने भी उनका खूब सपोर्ट किया है। इस फसल को देख आसपास के ग्रामीण उनसे निरंतर इसके बारे में पूछ रहे हैं। कुछ ग्रामीणों ने तो इसके उत्पादन का कार्य शुरू कर दिया है। अब राजीव अन्य ग्रामीणों के लिए मिसाल बन कर सामने आए हैं।

कॉर्नेशन पुष्प का भी उत्पादन करेंगे विजय

विजय ने बताया कि उनके पास 0.50 हैक्टेयर भूमि है। जिसमें से 0.20 हैक्टेयर कॉर्नेशन पुष्प उत्पादन कार्यक्रम एवं 0.30 हैक्टेयर में आगामी वर्षों में विदेशी सब्जियों एवं औषधि युक्त पौधो का उत्पादन करेंगे। उन्होंने बताया कि 2000 वर्ग मीटर पॉलीहाउस में वह 1000 वर्गमी0 में 25 हजार लिलियम बल्ब एवं शेष 1000 वर्गमी0 में 22 हजार कार्नेशन पुष्प पौध रोपित करेंगे। जिससे प्रति 1000 वर्गमी. में 35 हजार बल्बों का उत्पादन होगा।

बेहतर उत्‍पादन कर राजीव ने कमाया मुनाफा

एनके आर्य, जिला उद्यान अधिकारी चम्पावत ने बताया कि राजीव का यह प्रयास काफी अच्छा है। पहली ही बारी में उन्होंने लिलियम का अच्छा उत्पादन कर अच्छा मुनाफा कमाया है। जिसमें उद्यान विभाग ने उन्हें काफी सपोर्ट किया है। राजीव को देख अन्य किसान भी इसके उत्पादन के बारे में सोच रहे हैं।

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