हरीश रावत ने भाजपा पर निशाना साधा


देहरादून। संवाददाता। जैसे-जैसे 2019 के चुनाव करीब आ रहे है देश में एक बार फिर अयोध्या का राम मन्दिर निर्माण मुद्दा गरमाता जा रहा है। अब की बार, राम मन्दिर पर आरकृपार की गूंज से अब कोई राज्य और दल तथा नेता अछूता नहीं है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इस मुद्दे पर भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि भाजपा फिर देश में साम्प्रदायिकता व तनाव का माहौल तैयार करने में जुटी हुई है।

हरीश रावत ने इस मुद्दे पर सीधा सवाल खड़ा करते हुए कहा है कि पांच साल से केन्द्र में भाजपा की सरकार है। उसे एक बार भी अयोध्या में राम मन्दिर निर्माण की याद क्यों नहीं आयी। उन्होने अब भाजपा नेता और सांसद अध्यादेश लाकर राम मन्दिर निर्माण की बात कर रहे है। साधू संतो द्वारा आमरण अनशन और आत्मदाह की बातें की जा रही है। संघ और शिवसेना के नेताओं द्वारा भी लगातार ऐसे बयान दिये जा रहे है जो सरकार पर दबाव बनाने वाले है। उन्होने कहा कि चार साल तक राम मन्दिर के निर्माण पर सभी चुप क्यों बैठे रहे? उनके पास राम मन्दिर निर्माण के लिए पर्याप्त समय था? चुनाव नजदीक आते ही हर बार भाजपा नेताओं द्वारा क्यों राम मन्दिर निर्माण को हवा दी जाती है इस सवाल पर नेताओं और जनता दोनों को सोचने की जरूरत है। उन्होने कहा कि एक बार फिर राजनीतिक लाभ के लिए देश के समाज को साम्प्रदायिकता की आग में झौंकने की कोशिश की जा रही है तथा देश और समाज हित के मुद्दों से जनता का ध्यान हटाने का प्रयास किया जा रहा है।

इस बीच हरिद्वार में चल रहे सांस्कृतिक मेले में पहुंची भाजपा नेत्री व केन्द्रीय मंत्री उमा भारती ने आज कहा कि अयोध्या में राम मन्दिर तो बनकर ही रहेगा। मन्दिर बनाने से कोई नहीं रोक सकता है। उन्होने कहा कि साधू संतों की भावनाओं को समझने की जरूरत है। उन्होने गंगा की अविरलता व स्वच्छता के लिए प्राणों का बलिदान करने वाले स्वामी सानन्द को भी याद करते हुए कहा कि गंगा की स्वच्छता सभी का दायित्व है। इस बीच आज हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर ने राम मन्दिर पर पार्टी लाइन से अलग बयान देते हुए सभी को चौंका दिया। उनका कहना है कि इस मुद्दे पर अध्यादेश लाने की कोई गुंजाइश नहीं है अगर आम सहमति नहीं बनती हो तो कोर्ट फैसला करेगा। भाजपा के नीतिकार अब उनके बयान का अर्थ तलाश रहे है। उधर अयोध्या में धर्म सभा का आयोजन व शिव सेना की शिरकत से माहौल गर्म हो चला है सुरक्षा के मद्देनजर यहां भारी सुरक्षा बलों की तैनाती की गयी है और पूरा अयोध्या छावनी में तब्दील कर दिया गया है।

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