उत्तराखंडः लोकसभा चुनाव के लिए त्रिवेंद्र सरकार की तैयारी शुरू, सड़कों पर किया फोकस


देहरादून। नगर निकाय चुनाव के बाद प्रदेश की त्रिवेंद्र सरकार ने लोकसभा चुनाव की तैयारी शुरू कर दी हैं। चालू वित्तीय वर्ष 2018-19 की अंतिम तिमाही को चुनावी साल की तरह लेते हुए सरकार ने सुशासन, पारदर्शिता का संदेश देने के साथ ही निर्माण कार्यों खासतौर पर सड़कों का जाल बिछाने पर फोकस किया है।

बजट में बड़ी धनराशि जिस तरह सड़कों के निर्माण को रखी गई है, उससे ये संकेत भी साफ हैं कि आम जनता के दिलों में दस्तक देने की राह सड़कों के निर्माण के ’रास्ते’ तय की जा रही है। वहीं 510 करोड़ की राशि से वेतन-भत्ते और पेंशन मिलने में दिक्कतें पेश नहीं आने वाली।
कर्मचारियों की झोली में सातवें वेतनमान का बकाया एरियर और भत्ते डालने के संकेत भी दिए गए हैं। अलबत्ता, अतिरिक्त संसाधन जुटाने के बजाय सरकार की रणनीति चार्वाक दर्शन पर बढ़ते हुए कर्ज के घी से ही दिए जलाने की है। सरकार की उम्मीदें केंद्रपोषित योजनाओं के साथ ही बाजार से लिए जाने वाले 2200 करोड़ से ज्यादा कर्ज पर अधिक टिकी हैं।

केंद्रीय योजनाओं मदद पर टकटकी अनुपूरक बजट में महकमों की जरूरत की बाजीगरी को देखें तो यह भी साफ है कि राज्य सरकार का अगली तिमाही में पूरा जोर लोकलुभावन योजनाओं और सड़कों के निर्माण पर रहेगा। यह मंजिल केंद्रपोषित योजनाओं और केंद्र सरकार की मदद के जरिये ही पाने का सरकार का इरादा है। इसीवजह से सरकार ने अनुपूरक बजट में भी विशेष केंद्रीय सहायता के तहत 100 करोड़ की बजटीय व्यवस्था की है।

यही नहीं अनुपूरक में 697.59 करोड़ का प्रावधान संसाधन संबद्ध योजनाओं के तहत किया गया है। इसमें से 644.06 करोड़ केंद्र सहायतित योजनाओं और 53.53 करोड़ का प्रावधान बाह्य सहायतित योजनाओं में किया गया है। बढ़ते खर्च के दबाव के चलते उत्तराखंड राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम की मार से बचने के लिए सरकार ने केंद्र सहायतित योजनाओं पर दांव खेलना मुनासिब समझा है। सड़कों-कल्याण योजनाओं पर दांव अनुपूरक बजट में सड़कों को अहमियत देते हुए लोक निर्माण कार्यों के लिए 223.93 करोड़ बजट रखा गया है।

प्रधानमंत्री ग्राम सडक योजना के साथ ही सडकों के निर्माण के लिए सरकार पोटली खोलेगी। इसके बाद ग्राम्य विकास के लिए 218.17 करोड़ का प्रावधान है। कल्याण योजनाओं के लिए 123.69 करोड़ की व्यवस्था रखी गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यो के साथ ही कल्याण योजनाओं के लिए धन का ठीक-ठाक बंदोबस्त किया गया है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, नए ग्रामीण उपकेंद्रों, प्रधानमंत्री आवास योजना और किसान पेंशन योजना के लिए भी धनराशि रखी गई है।

वित्त मंत्री प्रकाश पंत का कहना है कि विकास कार्य और जन कल्याण योजनाएं सरकार की प्राथमिकता में हैं। इसके साथ ही लोक वित्तीय प्रबंधन को मजबूत कर पारदर्शिता और सुशासन के एजेंडे को धार देने में सरकार जुटी है। बाजार के कर्ज पर दारोमदार हालांकि, अनुपूरक बजट में भी सरकार की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। आमदनी के नए स्रोत नहीं होने और केंद्र से मिलने वाली मदद का दायरा एक हद तक सीमित होने की वजह से राज्य सरकार को बाजार के कर्ज पर टकटकी बांधनी पड़ रही है। वेतन-भत्ते व पेंशन देने का दारोमदार कर्ज पर ही है।

अब तक बाजार से कर्ज का आंकड़ा 4750 करोड़ तक पहुंच रहा है। राज्य के लिए केंद्र की ओर से 7034 करोड़ सालाना कर्ज की सीमा निर्धारित है। इस आधार पर राज्य सरकार अंतिम तिमाही तक 2200 करोड़ से ज्यादा कर्ज बाजार से ले सकती है। मानें या न मानें अनुपूरक बजट का असली आधार इस कर्ज को भी बताया जा रहा है।

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