जिलों में विकास कार्यों पर सीएम की होगी सीधी नजर


देहरादून। प्रदेश में सरकारी महकमों के साथ ही जिलों को भी अलर्ट होना पड़ेगा। जी हां, जिलों में ही जन समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो जिला प्रशासन से लेकर संबंधित महकमे सीधे मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के निशाने पर रहने वाले हैं। जिलाधिकारियों को अब हर रोज मुख्यमंत्री को केंद्र और राज्य की प्राथमिकता वाली विभिन्न योजनाओं से आम जनता को लाभ पहुंचने और विकास कार्यो की दैनिक रफ्तार का लेखा-जोखा ऑनलाइन मुहैया कराना होगा।

सीएम मॉनीटरिंग डैशबोर्ड ’उत्कर्ष’ में सभी जिलों को भी शामिल करने का निर्णय लिया गया है। मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने सभी जिलाधिकारियों एवं मंडलायुक्तों से डैशबोर्ड में प्राथमिकताओं वाले कार्यक्रमों को सम्मिलित करने के बारे में सूचनाएं देने के निर्देश दिए हैं। जिलों में सरकारी महकमों को अपने कामकाज का परफॉरमेंस आधारित परिणाम खुद मुख्यमंत्री को बताना होगा।

ऐसा नहीं करने वाले महकमों और उनके अधिकारियों के साथ ही जिलाधिकारी भी मुख्यमंत्री के निशाने पर रहने वाले हैं। सीएम डैशबोर्ड उत्कर्ष में जिलों के शामिल होने के बाद तमाम महकमों सीएम डैशबोर्ड के की परफॉरमेंस इंडीकेटर (केपीआइ) के रडार पर होंगे। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सुशासन के एजेंडे पर और एक कदम आगे बढ़ाया है। एक साल के भीतर ही सीएम डैशबोर्ड के दायरे को 13 जिलों तक बढ़ा दिया गया है।

मुख्यमंत्री बीते वर्ष 25 दिसंबर को सुशासन दिवस पर सीएम मॉनीटरिंग डैशबोर्ड का अनावरण किया था। डैशबोर्ड को 15 महकमों के साथ शुरू किया गया, लेकिन अभी तक इसमें 32 प्रशासकीय विभागों के आउटकम आधारित केंद्र सरकार के प्राथमिकता कार्यक्रमों, महत्वपूर्ण योजनाओं के ब्योरे को प्रदर्शित किया जा चुका है। उत्कर्ष का उद्देश्य मुख्य रूप से जन उपयोगी कार्यक्रमों की परिणाम आधारित प्रगति की नियमित मॉनीटरिंग है।

मुख्यमंत्री की सचिव राधिका झा ने मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह के हवाले से सभी 13 जिलों के जिलाधिकारियों और गढ़वाल व कुमाऊं मंडलायुक्तों को आदेश जारी कर उत्कर्ष में जिलों को भी शामिल करने को कहा है। जिलाधिकारियों से की परफॉरमेंस इंडीकेटर (केपीआइ) एवं प्राथमिकता कार्यक्रमों को उत्कर्ष में शामिल करने के संबंध में सूचनाएं मुख्यमंत्री सचिव को तुरंत उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

ये है सीएम डैश बोर्ड: सरकारी विभागों के कामकाज की समीक्षा के लिए ऐसी ऑनलाइन व्यवस्था जिसमें वित्तीय और भौतिक प्रगति का आकलन आंकड़ों के आधार पर नहीं, बल्कि जनता को धरातल पर मिलने वाले लाभ के आधार पर की जा रही है। डैशबोर्ड में केंद्र और राज्य सरकार की प्राथमिकता वाले कार्यक्रमों के संबंध में विभागों की परफॉरमेंस पर मुख्यमंत्री नियमित रूप से सीधी नजर बनाए हुए हैं। विभागों के लिए की परफॉरमेंस इंडीकेटर (केपीआइ) भी निर्धारित हैं। डैशबोर्ड में अब तक 32 विभागों को शामिल किया जा चुका है।

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