पचास साल पुराने सिवर से चल रहा राजधानी का काम


देहरादून। संवाददाता। उत्तराखण्ड की राजधानी देहरादून अंग्रेजो के जमाने के सीवर सिस्टम से ही अपना काम चला रही है। यह बात अलग है कि राजधानी के लोग आये दिन इन सीवर लाइनों के चैक रहने के कारण गटरों से बहने वाले गंदे पानी की बदबू भरे वातावरण में रहने के आदी हो चुके है। सरकार और सरकारी महकमें सिस्टम को सुधारने की बजाय अब होटल और रेस्टोरेंटों को नोटिस थमाकर उन पर एसटी पर संयत्र लगाने के लिए दबाव बनाया जा रहा है।
भले ही राज्य गठन के समय से ही देहरादून को राजधानी के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा हो लेकिन बीते 18 सालों में दून को राजधानी स्तर की जन सुविधाओं से लैस नहीं किया जा सका है।

दून की सड़क, बिजली, पानी की सुविधांए तो जैसी है वैसी है ही लेकिन सबसे अधिक खस्ताहाल स्थिति राजधानी के सीवर सिस्टम और डेनेज सिस्टम की है। जिसके कारण दूनवासियों का जीवन दूभर स्थिति में है। खास बात यह है कि इस सीवर और डै्रनेज सिस्टम को सुधारा जाना संभव नहीं है क्यों कि यह सिस्टम 50 साल से भी अधिक पुराना हो चुका है। सीवर लाइन न सिर्फ जगह जगह से टूटती रहती है अपितु बीते दो दशक में बढ़ी आबादी के कारण इन सीवर लाइनों पर क्षमता से कहीं अधिक दबाव रहता है।

जिससे आये दिन इन सीवर लाइनों का चैक होना बड़ी मुसीबत का सबब बन चुका है। जल निगम को हर रोज सीवर लाइनों को चैक होने की दर्जनों शिकायत मिलती है और कर्मचारी बांस की खपची लेकर इन्हे खोलने मेें जुटे रहते है। जहंा भी सीवर लाइनें चैक होती है गंदा पानी सड़कों पर बहने लगता है।

सही मायने में इन सीवर लाइनों की मरम्मत नहंी बल्कि इन्हे बदले जाने और अपग्रेट किये जाने की जरूरत है। कहने को दून का स्मार्ट शहरों की सूची मेें शामिल किया गया है जबकि इस शहर का सीवर सिस्टम व डै्रनेज सिस्टम किसी मामूली शहर या कस्बे का स्तर का ही है। उपभोक्ताओं को यह बताकर कि वह इनका इस्तेमाल कैसे करें काम नहीं चल सकता है। होटल व रेस्टोरेंटों को जो नोटिस दिये गये है जिनमें उन्हे एसटीपी सिस्टम लगाने को कहा गया है यह सिस्टम कानून 20 कमरों से ऊपर वाले होटल व रेस्टोरेंटों पर ही लागू होता है लेकिन दून के छोटे होटलों व रेस्टोंरेंटों को यह नोटिस भेजे जा रहे है जो नियम विरूद्ध है।

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