24 व 25 दिसंबर को प्रथम राष्ट्रीय वेद सम्मेलन आयोजित


देहरादून। संवाददाता। देवभूमि हमेशा से ही चारधाम, पंचप्रयाग व गंगा, यमुना आदि के उदगम स्थल होने के चलते साधकों व ऋषि मुनियों की तपस्थली रही है। इस पावन भूमि पर चिरकाल से ही वेदों, पुराणों व उपनिषदों आदि पर गहन शोध होता रहा है। विश्व में तेजी से बढ़ते पाश्चात्य अधांनुकरण ने मानवीय संवेदनाओं को विकृत कर दिया है। वेदां का अनुशीलन करके ही मानव मात्र को सन्मार्ग की ओर उन्मुख किया जा सकता है जिसकी अधिक आवश्यकता है। इसी परिप्रेक्ष्य में मार्तण्ड वेदकृविज्ञान अनुसन्धान संस्थान 24 व 25 दिसम्बर को दो दिवसीय वेद सम्मेलन का आयोजन विकासगर विद्यापीठ मार्ग स्थित गार्ड रिसोर्ट में होने जा रहा है। 

प्रैस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान यह जानकारी संस्थान के अध्यक्ष प. सुनील पैन्यूली ने दी। उन्होने कहा कि इस सम्मेलन का उद्देश्य आधुनिक युग में वेदों के आध्यात्मिक, धार्मिक तथा वैज्ञानिक महत्व जनमानस के समक्ष प्रस्तुत करना है। ताकि इच्छुक लोग वेदां के अध्यन व अनुसंधान के प्रति जागरूक हो। सम्मेलन में वेदों के प्रचार-प्रसार व शोध करने वाले वेदज्ञों को पुरस्कृत किया जायेगा।

इस सम्मेलन में चार वेदों व उनकी शाखाओं के ज्ञाता वेदों पर अपना शोध प्रस्तुत करेंगें तथा विश्व में शान्ति व सदभाव के लिए चारों वेदों का पाठ करेंगे। सम्मेलन में एक प्रदर्शनी भी लगायी जायेगी। जिसमें वेदों के निर्देश व यज्ञों में प्रयुक्त होने वाले पात्रों के महत्व को प्रदर्शित किया जायेगा। बताया कि जल्द विकासनगर में एक वेद विद्यालय खोला जायेगा। जिसमें निःशुल्क वेद पाठन कराया जायेगा। सम्मेलन में 15 राज्यों के 250 विद्वान प्रतिभाग करेंगे।

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