राजकीय प्राथमिक स्कूल गुरना : कभी बंद होने की कगार पर था आज अब्बल स्कूल बन नाम कमा रहा है

सरकारी स्कूल के बच्चों की भी अब ‘अपनी’ बस है गुरना का आदर्श प्राथमिक विद्यालय आज से दो साल पहले ही बंद होने की कगार पर था। इस विद्यालय में वर्ष 2016 में मात्र 13 बच्चे थे। महज दो साल के भीतर यहां छात्र संख्या बढ़कर 179 पहुंच गई है। शायद यह प्रदेश में अकेला सरकारी स्कूल हैं जहां नर्सरी से कक्षाओं का संचालन किया जा रहा है। अब स्कूल की अपनी बस भी है। इस स्कूल की बढ़ती साख का ही सबब है कि खंड शिक्षा अधिकारी के दो बच्चे भी इस स्कूल में पढ़ रहे हैं।

पिथौरागढ : परिवर्तन समाज के जाग्रत होने से ही आता है। गुरना का आदर्श प्राथमिक विद्यालय इसका उदाहरण है। जो विद्यालय दो साल पहले बंद होने की कगार पर था। आज आदर्श  विद्यालय बन लोगो के लिए प्रेरणा का कारण बन गया है। राजकीय प्राथमिक स्कूल गुरना में पढ़ने वाले बच्चों के लिए भी अब स्कूल की अपनी बस हैं। इन बच्चों को अब लिफ्ट मांगने, जीप में लटकने और पैदल ही दूरी नापने से निजात मिल गई है।

गुरना का स्कूल है तो सरकारी लेकिन अन्य स्कूलों से जरा हटकर है। प्रदेश का शायद यह पहला सरकारी स्कूल होगा जहां बच्चों के लिए स्कूल बस की व्यवस्था हुई है। स्कूल में इस समय नर्सरी से पांचवीं कक्षा तक के 16 किमी के दायरे से आने वाले 179 बच्चें हैं। मौसम ठीक भी रहे तो भी इस स्कूल तक पहुंचना बच्चों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं होता था। जिला मुख्यालय पिथौरागढ़ के अलावा बिषाड़, सेरा, राड़ीखूटी सहित आसपास के गांवों के बच्चे भी यहां पढ़ने आते हैं।

स्कूल ने बच्चों की शिक्षा और अन्य सुविधाओं का भी ध्यान रखा है। स्कूल में संचालित होने वाली नर्सरी और केजी की कक्षाओं के लिए प्रबंध समिति ने सात शिक्षिकाएं नियुक्त की हैं। इसके अलावा बच्चों की देखभाल के लिए दो आया भी हैं। खुद बच्चे स्कूल की इस पहल से खुश हैं।!

कभी बंद होने की कगार पर था यह स्कूल

गुरना का आदर्श प्राथमिक विद्यालय आज से दो साल पहले ही बंद होने की कगार पर था। इस विद्यालय में वर्ष 2016 में मात्र 13 बच्चे थे। महज दो साल के भीतर यहां छात्र संख्या बढ़कर 179 पहुंच गई है। शायद यह प्रदेश में अकेला सरकारी स्कूल हैं जहां नर्सरी से कक्षाओं का संचालन किया जा रहा है। अब स्कूल की अपनी बस भी है। इस स्कूल की बढ़ती साख का ही सबब है कि खंड शिक्षा अधिकारी के दो बच्चे भी इस स्कूल में पढ़ रहे हैं।।

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