चोर बनाम चौकीदार : सिद्धस्त चोरों की जमात- कांग्रेस-नरेन्द्र सहगल

देश के तथाकथित स्वयंभू सम्भावित प्रधानमंत्री और कांग्रेस के अध्यक्ष श्री राहुल गांधी ने राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक शिष्टाचार को तिलांजलि देकर बेशर्मी की सभी हदें पार कर दी हैं। देश के वर्तमान यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र भाई मोदी जैसे त्यागी, तपस्वी, परिपक्व और राष्ट्र के लिए अपना सारा जीवन समर्पित करने वाले व्यक्ति को चोर कहने का दुस्साहस किया जा रहा है। जो लोग स्वयं भ्रष्टाचार और चोरी के आरोपों से आकंठ दूबे हुए हैं और जमानतों पर छूट कर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंक रहे हैं, इनकी चोरों की जमात का असली नाम है कांग्रेस।

सच्चाई तो यह है कि इस जमात ने सिर्फ घपले घोटाले करके अरबों-खरबों का धन ही नहीं बटोरा बल्कि अपना नाम, काम, व्यवहार, पद्धति और यहां तक कि अपने गोत्र तक भी चुराए हुए हैं। इस जमात का तो झंडा, चुनाव चिन्ह, दफ्तर और कार्यपद्धति भी चुराई हुई है। यह जमात असंवैधानिक और अनैतिक ढंग से अपने को ‘भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस’ कहती है। सर्वविदित है कि वर्तमान कांग्रेस (आई) की स्थापना स्वर्गीय श्रीमती इंदिरा गांधी ने ‘भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस’ के दो टुकड़े करके की थी। पता नहीं क्यों देश के बुद्धिजीवी, पत्रकार और राष्ट्रीय चिंतक कांग्रेस के इस बनावटी/मिलावटी राजनीतिक ड्रामेबाजी की पोलपट्टी क्यों नहीं खोलते। भारत का चुनाव आयोग भी इस चोरी के नामकरण पर मौन साधे हुए है।

हाल ही में लखनऊ में सम्पन्न हुए कांग्रेस आई के रोड शो में कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी और महासचिव श्रीमती राबर्ट वाड्रा की मौजूदगी में और उनके ही उकसाने पर कुछ लोगों ने ‘गली-गली में शोर है – चौकीदार चोर है’ जैसे नारे लगाए। देश के प्रधानमंत्री को बार-बार चोर कह कर अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन को पुनः हासिल करने के प्रयास में कांग्रेस आई के नेता (भाई-बहन) जरा अपने गिरेबान में झांककर देखेंगे तो उन्हें पता चलेगा कि असली चोर कौन है? लखनऊ में चौकीदार को चोर बताने वाले यही कांग्रेसी नेता उसी रात जयपुर में रंगेहाथों पकड़े गए और आरोपित चोर (राबर्ट वाड्रा) के साथ हमदर्दी जुटाने जा पहुंचे। श्रीमती राबर्ट वाड्रा यह भी भूल गई कि वह कांग्रेस आई की महासचिव भी है। क्या यह इस बात का स्पष्टीकरण नहीं है कि राबर्ट वाड्रा द्वारा किए गए महाघोटालों को कांग्रेस आई का समर्थन प्राप्त है।

जिस कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल जी हैं, उसके अधिकांश नेता घपले घोटालों के आरोपों में फंसे हुए हैं और जो अभी बचे हुए हैं वे भी मई 2019 के बाद फंसने वाले हैं। स्वयं राहुल गांधी नेशनल हेराल्ड में हुए अरबों के घोटालों के आरोपी हैं और जमानत पर बाहर घूम रहे हैं। इसी केस में कांग्रेस आई की पूर्व अध्यक्ष और वर्तमान में संरक्षक श्रीमती सोनिया गांधी भी जमानत पर है इस दल की महासचिव श्रीमती राबर्ट वाड्रा द्वारा मशोबरा (शिमला) में ‘राबर्ट वाड्रा स्टाइल’ से खरीदी गई लगभग 5 एकड़ जमीन पर गैर कानूनी ढंग से बनाए गए महल और बाग बगीचे पर भी उंगलियां उठ रहीं हैं।

इसी दल के कद्दावर नेता चिदम्बरम इत्यादि की सूची भी बहुत लम्बी है, जिन्होंने करोड़ों के घपले किए हैं और न्यायालयों में आरोपी के रूप में चक्कर काट रहे हैं। कईयों का तो पूरा परिवार ही कानून के तहत ‘चौकीदार’ के शिकंजे में आया हुआ है। इसी चौकीदार से डर कर विदेशों में भाग खड़े हुए महा घोटालेबाज भी अब चौकीदार के कानूनी जाल में फंसते जा रहे हैं।

अब जरा ‘कांग्रेस आई कहां से आई?’ पर भी विचार करें। इस जमात ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का नकाब ओढ़ा हुआ है। 80 के दशक में जब श्रीमती इंदिरा गांधी की महत्वाकांक्षा के कारण पार्टी दो फाड़ हुई तो न्यायालय ने इंदिरा जी द्वारा ठुकराए गए पुराने नेताओं के गुट (कांग्रेस संगठन/ओल्ड कांग्रेस) को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस मानते हुए कांग्रेस का दफ्तर (जंतर-मंतर) झंडा और चुनाव चिन्ह (बैलों की जोड़ी) इसी कांग्रेस को सौंप दिए तब श्रीमती इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाला गुट कांग्रेस आई अस्तित्व में आया था। इसका चुनाव चिन्ह गाय बछड़ा हो गया। कालांतर में यह चिन्ह ‘हाथ’ के रूप में बदल गया। बाद में आपात काल के पश्चात जब सभी विपक्षी दलों ने मिलकर जनता दल की स्थापना की तो असली कांग्रेस यानि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का जनता दल में विलय हो गया। अतः वर्तमान की कांग्रेस वास्तव में कांग्रेस आई है।

इसी प्रकार जरा ‘नेहरू-गांधी परिवार’ का भी पारिवारिक लेखा-जोखा कर लें। श्रीमती इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी को नेहरू खानदान का वारिस बताया जाता है। वास्तव में इनमें न कोई गांधी है और न ही नेहरू। पंडित नेहरू का कोई बेटा नहीं था, उनका वंश समाप्त हो गया। उनकी बेटी इंदिरा जी का विवाह फिरोज खान के साथ हुआ। उन्हें महात्मा गांधी ने गांधी नाम दान में दिया था। असलियत यह है कि यह सभी नकली गांधी वस्तुतः फिरोज खान के वंशज हैं और सोनिया जी के आने के बाद तो यह परिवार प्रायः ईसाई हो गया।

इस परिवार का विशेषतया राहुल गांधी एवं राजीव गांधी का गौत्र ‘कौल ब्राह्मण’ कैसे हो गया? हाल ही में राहुल जी ने पंडित नेहरू के गोत्र कौल (सारस्वत ब्राह्मण) को उठाकर अपने नाम के साथ जोड़कर कोट के ऊपर ही जनेऊ पहन लिया। यह सब कुछ राजनीतिक चोरी ही नहीं बल्कि डाका है। जो लोग श्रीराम और रामसेतु के अस्तित्व पर ही सवाल उठाते हैं वही अब अपने को हिन्दू सिद्ध करने की फिराक में झूठों का गट्ठर सिर पर उठाकर प्रधानमंत्री को चोर-चोर कहते हुए जगह-जगह धक्के खा रहे हैं।

वास्तव में लंदन से लेकर इटली तक इस परिवार की अपार सम्पत्तियां हैं। इस परिवार की ईमानदार प्रमुख सदस्या श्रीमती मेनका गांधी और उनके पुत्र वरुण गांधी को इन लोगों ने रात के अंधेरे में धक्के देकर घर से निकाल दिया। अतः यह परिवार और इनकी पार्टी दोनों ही मिलावटी हैं।

-नरेन्द्र सहगल

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