उत्तराखण्ड की पांचों सीटों पर जानिये क्या है राजनैतिक समीकरण


देहरादून। आशीष बडोला। लोकसभा चुनाव की पांच सीटों पर भाजपा और कांग्रेस दोनों दिग्गज पार्टियों के प्रत्याशियों ने नामांकन कर दिए हैं। वहीं अब सभी की निगाह मतदान के बाद आने वाले नतीजों की ओर हैं। जानते हैं किस सीट पर रहेगा किसका दबदबा। कौन होगा भीतरीघात का शिकार।

पांचों सीटों पर दोनों पार्टियों ने योद्धाओं को उतार दिया है। अब निगाह एक-एक वोट और राजनैतिक पैतरे बिठाने की है। सबसे पहले बात करे टिहरी सीट की तो यहां भाजपा ने रानी राज्य लक्ष्मी शाह पर भरोसा दिखाया है। वो पहले भी दो बार इसी सीट से सांसद चुनी जा चुकी है। वहीं कांग्रेस ने प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह पर भरोसा जताया है। जो जौनसार क्षेत्र में मजबूत पकड़ रखने के साथ ही राज्य बनने के बाद से लगातार चार बार के विधायक रह चुके हैं।

बता दे कि यहां सबसे महत्वपूर्ण मसूरी, धनोल्टी और गंगोत्री का पहाड़ी समीकरण है जो इस सीट पर प्रत्याशी की जीत का रास्ता बनायेगा। यहां का मतदाता खुलकर सामने नहीं आ रहा है। वहीं रानी से भी यहां के लोग नाराज बताएं जा रहे हैं। जबकी प्रीतम सिंह यहां पार्टी भरोसे ही चल रहे हैं। फिलहाल टिहरी सीट किसके हाथ लगेगी कुछ कहा नहीं जा सकता है। इस सीट पर कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है। बात यदि हरिद्वार सीट पर करे तो यहां पूर्व मुख्यमंत्री व सांसद डाॅ रमेश पोखरियाल निशंक का पलड़ा भारी दिख रहा है। इस सीट पर कांग्रेस ने पूर्व विधायक अंबरीश कुमार पर दांव खेला है। जो गैर कांग्रेसी पृष्ठभूमि के नेता है।

हालांकि वो हरिद्वार में जाना पहचाना नाम जरूर है। मगर जनता तक उनकी पहुंच डाॅ निशंक के मुकाबले काफी पिछड़ी हुई साबित हो रही है। ऐसे में हरिद्वार सीट भाजपा के पाले में आना तय समझा जा रहा है। पौड़ी लोकसभा सीट का मिजाज भी स्पष्ट नहीं है। पूर्व मुख्यमंत्री जनरल खंडूरी के शिष्य तीरथ सिंह रावत व कांग्रेसी ने खंडूरी के बेटे मनीष खंडूरी को प्रत्याशी उतारा है। हालातों को देखते हुए खंडूरी ने इस बार शांत रहना ही उचित समझा है। राजनैतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि खंडूरी भीतर ही भीतर अपने बेटे को समर्थन कर सकते हैं। मगर यमकेश्वर सीट से विधायक उनकी बेटी पार्टी पक्ष में रैली करेंगी या नहीं यह साफ नहीं हो सका है।

इसी बात से इस सीट पर आंकलन करना बेहद मुश्किल हो गया है। वहीं तीरथ सिंह रावत भी चैबट्टाखाल विधानसभा क्षेत्र से पूर्व विधायक रह चुके हैं। साथ ही उनकी छावि पौड़ी सीट के लिए उभरते हुए एक कद्दावर नेता की मानी जाती है। साथ ही पार्टी व संघ सहित केंद्र में भी उनका वर्चस्व कायम हैं। वहीं नैनीताल सीट पर दोनों प्रत्याशी अपनी-अपनी पार्टियों में खासा साख रखते हैं। कांग्रेस की ओर से इस सीट पर दिग्ग्ज नेता हरीश रावत मैदान में हैं तो भाजपा से प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट उनका सामना करने को तैयार हैं। कांग्रेस के भीतरी सूत्रों की माने तो नेता विपक्ष इंद्रा हदृयेश-हरीश रावत को टेढ़ी नजर से देखती हैं। इसका कारण विधानसभा चुनाव मंे इंद्रा के बेटे को हरीश रावत ने हराने के लिए भीतरीघात किया था।

वहीं अब इंद्रा भी पुराना बदला लेने को आतुर हैं। दोनों के टकराव की खबरे बार-बार मीडिया में सुर्खियां बनी रही। वहीं अजय भट्ट भी विधानसभा चुनाव में भीतर घात का शिकार हुए थे। उन्हें भी पार्टी के कुछ नेता जीतता हुआ नहीं देखना चाहते। ऐसे में इस सीट पर जीत किसकी होगी, आने वाला समय ही तय करेगा। अल्मोड़ा लोकसभा सीट की बात करे तो इस सीट पर दोनों ही प्रत्याशी माहिर राजनेता की छवि रखते हैं। जहां एक ओर प्रदीप टम्टा को भारी अनुभवी और जमीन से जुड़ा हुआ नेता बताया जाता है। वहीं अजय टम्टा भाजपा में एकमात्र ऐसे बड़े नेता हैं। जिन्होंने ग्राम प्रधान से लेकर कम उम्र में ही केंद्रीय राज्य मंत्री तक का दर्जा हासिल किया है।

इस सीट पर टम्टा बनाम टम्टा का जातिय समीकरण कुछ खास काम नहीं करने वाला है। जनता उसे ही अपना नेता चुनेगी जिसका जुड़ाव सीधा विकास को प्राथमिका देना होगा। राजनैतिक विशेषज्ञों की माने तो नैनीताल और अल्मोड़ा सीट पर स्टार प्रचारक के तौर पर भगत सिंह कोश्यारी भाजपा प्रत्याशियों की जीत में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

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