हाईकोर्ट के आदेशों के बावजूद अतिक्रमण पर प्रशासन का सुस्त रवैया

देहरादून। संवाददाता। बीते वर्ष हाईकोर्ट द्वारा दिये गये अतिक्रमण पर सख्त आदेशों के बाद सुस्त पड़े प्रशासन और सरकार को एक बार फिर नैनीताल हाईकोर्ट द्वारा झकझौरा गया है। हाईकोर्ट द्वारा दून के अवैध निर्माणों पर गम्भीरता दिखाते हुए शासन कृप्रशासन को सख्त निर्देश दिये गये है कि वह दून के नदी, नालों और खालों में हुए अवैध निर्माणों को हटाना सुनिश्चित करे।

राजधानी देहरादून में सबसे अधिक अतिक्रमण की मार नदी, नालों व खालों पर ही पड़ी है। नदी, नालों और खालों पर हुए अधंाधुध अतिक्रमण और अवैध निर्माणों के कारण दून का मूल स्वरूप पूरी तरह से बिगड़ चुका है जिस पर नैनीताल हाईकोर्ट द्वारा एक बार फिर सख्त रूख अपनाते हुए अपनी टिप्पणी में शासनकृप्रशासन को निर्देश दिये गये है कि दून की सभी नदियों जिसमें रिस्पना और बिंदाल भी शामिल है तथा खालों को पुराने रूप में बहाल करने के लिए उनके क्षेत्र में हुए अवैध निर्माणों को हटाया जाये।

उल्लेखनीय है कि बीते वर्ष नैनीताल हाईकोर्ट द्वारा एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अतिक्रमण को पूरी तरह हटाने तथा अवैध बस्तियों को ध्वस्त करने के निर्देश दिये गये थे। प्रशासन द्वारा बड़े जोर शोर से राजधानी की सड़कों पर महाअभियान भी चलाया गया था लेकिन प्रशासन की ढीली चाल और राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण यह अभियान ठप हो गया था। बात जब नदी, नालों और खालों में बसी सैकड़ों बस्तियों को उजाड़ने की आयी तो सरकार ने भी इस पर आपत्ति जताई। यही नहीं अध्यादेश लाकर इन तमाम अवैध बस्तियों को बचा लिया गया था। सरकार ने कोर्ट को भरोसा दिलाया था कि इन बस्तियों में रहने वालों के लिए वह एक साल के अन्दर अटल आवास योजना के तहत बनने वाले घरों में आवास की व्यवस्था करेगें। लेकिन इसके बाद सरकार ने भी इस मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया था
हालांकि नगर निगम द्वारा वर्तमान में भी दून मे अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। लेकिन सवाल नदी नालों और खालों में हुए अवैध निर्माण और बस्तियों का है। अब देखना यह है कि अदालत के ताजा दिशा निर्देशों के बाद नालों, खालों व नदियों पर हुए अतिक्रमण के खिलाफ शासन प्रशासन द्वारा क्या कार्यवाही की जाती है।

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