पर्यावरण पर सरकार सजग- उत्तराखण्ड में बनेगा अलग पर्यावरण मंत्रालय


देहरादून। संवाददाता। पर्यावरण और पारिस्थिति की दृष्टिकोण से बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण उत्तराखंड राज्य में आखिरकार एक पर्यावरण निदेशालय होगा। पर्यावरण से संबंधित मामलों में राय और फैसले देगा ये निदेशालय। अभी तक क्लाइमेट चेंज सेन्टर से ली जाती थी मदद। नए पर्यावरण निदेशालय से अदालती मामलों से निपटने में भी मदद मिलेगी। निदेशालय में एक निदेशक, 2 उपनिदेशक और वैज्ञानिक शामिल होंगे। त्रिवेंद्र कैबिनेट ने आज यह फ़ैसला किया है।

21 प्रस्तावों में दो स्थगित
राज्य मंत्रिमंडल की बैठक आज सुबह मुख्यमंत्री आवास में हुई। इसमें 21 प्रस्ताव कैबिनेट के सामने आए जिनमें से 2 प्रस्तावों को स्थगित कर दिया गया और 19 पर मुहर लगी। सरकार के प्रवक्ता मदन कौशिक ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी दी।

कौशिक ने बताया कि कैबिनेट के फैसले में सबसे महत्वपूर्ण गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान और नंदौर वन्य जीव अभ्यारण के इको सेंसेटिव जोन में संशोधन किया गया है। संशोधन कर अब इस ज़ोनों से अधिकतम गांव निकाल दिए गए हैं।

केंद्र को भेजा जाएगा ईको सेंसेटिव ज़ोन पर प्रस्ताव

कैबिनेट ने ईको सेंसटिव ज़ोन में 10 किलोमीटर के दायरे को कम करने का प्रस्ताव पास किया है। ये संशोधन प्रस्ताव पास हो गया तो खनन, पेड़ कटान जैसी 28 गतिविधियों के लिए राज्य सरकार से अनुमति मिल सकेगी। कैबिनेट से पास यह संशोधन प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा जाएगा। वहीं उम्मीद की जा रही है कि डबल इंजन सरकार में यह काम जल्द हो सकेगा।

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