‘दैशिक शास्त्र’ के जरिये सनातन हिंदू संस्कृति के मूल तत्वों से होगा विराट भारत का ‘जागरण’-डा. जोशी

डॉ. जोशी ने कहा, ‘दैशिक शास्त्र’ में पं.दीनदयाल ने स्वाधीनता आंदोलन, आजादी तथा इसके बाद के भारत की तस्वीर खींची, जिसमें वैदिक संस्कृति व सनातन धर्म वाले भारत का सपना बुना गया। कहा कि सनातन धर्म बढ़ेगा तो भारत बढ़ेगा। इसका ह्रास हुआ तो राष्ट्र का भी ह्रास होगा। कार्यशाला में ‘दैशिक शास्त्र’ पर उत्तराखंड के बुद्धिजीवियों व इतिहासविदों से शोध का आह्वान किया गया। 

अल्मोड़ा (संवाददाता) : पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जन्मशती पर उत्तरांचल उत्थान परिषद के तत्वावधान में रविवार को एकात्म मानव दर्शन एवं दैशिक शास्त्र के संदर्भ में ‘एक अक्षय, एकात्म और समग्र संतुलित विकास हेतु दिशा बोध’ विषयक दो दिनी कार्यशाला व व्याख्यानमाला के समापन पर जो निचोड़ निकला, उसने अल्मोड़ा में सृजित ग्रंथ ‘दैशिक शास्त्र’ के सूत्रों को मानववाद के नए जागरण की राह दिखाई। मुख्य वक्ता डॉ. जोशी ने कहा कि यह ग्रंथ सनातन हिंदू संस्कृति के मूल तत्वों से भारतीय राष्ट्र व्यवस्था के प्रति समाज को सजग करता है। इसमें पं. दीनदयाल के सूत्रों को अपना कर भारत में विराट जागरण का पथ प्रशस्त होगा।

डॉ. जोशी ने कहा, ‘दैशिक शास्त्र’ में पं.दीनदयाल ने स्वाधीनता आंदोलन, आजादी तथा इसके बाद के भारत की तस्वीर खींची, जिसमें वैदिक संस्कृति व सनातन धर्म वाले भारत का सपना बुना गया। कहा कि सनातन धर्म बढ़ेगा तो भारत बढ़ेगा। इसका ह्रास हुआ तो राष्ट्र का भी ह्रास होगा। बहरहाल, पांच सत्रों में चली कार्यशाला में ‘दैशिक शास्त्र’ पर उत्तराखंड के बुद्धिजीवियों व इतिहासविदों से शोध का आह्वान किया गया।

डॉ. जोशी ने एकात्म मानववाद व देशभक्ति आधारित ‘दैशिक शास्त्र’ को सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक तंत्र के विकास में उद्बोधक ग्रंथ बताया। कहा कि स्वामी दयानंद, स्वामी विवेकानंद, योगी अरविंद, लाल-बाल-पाल की त्रिमूर्ति, महामना मालवीय, रवींद्र नाथ टैगोर, महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस, डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार आदि क्रांतिकारी समूहों ने जो राह दिखाई, उसी के अनुरूप भारत को आगे बढ़ाना होगा।

डा. जोशी ने कहा कि अगर मानवता में धर्म नहीं है तो वह समाज को पतन की ओर ले जाएगा। उन्होंने कहा कि व्यक्ति और समाज में अन्योन्याश्रित संबंध है। यह एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। इसी का नाम पं दीन दयाल ने एकात्मक मानवतावाद दर्शन रखा था। उन्होंने कहा कि इस सेमिनार में मानववाद के पांचों तत्वों पर समाज के बुद्धिजीवियों द्वारा बौद्धिक मंथन और चिंतन किया गया। इस आयोजन में आर्थिक, ग्रामीण व राजनैतिक शुचिता को बनाए रखने पर जोर दिया गया। इस अवसर पर डा. महेश शर्मा ने पं. दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानवतावाद दर्शन का भूत,भविष्य व वर्तमान की महता पर प्रकाश डाला। इस मौके पर डा. प्रेम बड़ाकोटी,आचार्य सोमदेव,डा.महेश शर्मा ने विचार रखे।

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