बातचीत-वामपंथी इतिहासकारों ने मुसलमानों को गुमराह किया, नहीं तो मुद्दा सुलझ जाता – के.के. मुहम्मद

सिद्ध पुरातत्ववेत्ता और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के पूर्व क्षेत्रीय निदेशक (उत्तर) श्री के.के. मुहम्मद जी 1978 में डॉ. बी.बी. लाल की अगुआई वाली उस टीम

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इतिहास : ‘अयोध्या की वो राजकुमारी जो बनी कोरिया की महारानी’, किम जोंग-सूक 6 नवंबर को अयोध्या में दीपोत्सव में होंगी शामिल

दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे-इन की पत्नी किम जोंग-सूक अकेले भारत दौरे पर आ रही हैं. दक्षिण कोरिया की समाचार एजेंसी योनहाप ने

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इतिहास : इस वृक्ष पर दी गई 152 स्वतंत्रता सेनानियों को फांसी, अब होती है पूजा

रुड़की [दीपक मिश्रा] : रुड़की के निकट सुनहरा गांव के वट वृक्ष में एक साथ 152 स्वतंत्रता सेनानियों को फांसी दी गई थी। अब

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किल्मोड़ा से बनी एंटी डायबिटीज दवा, मिला इंटरनेशनल पेटेंट, अमेरिका की संस्था इंटरनेशनल पेटेंट सेंटर ने किया पेटेंट।

डॉ. लालजी सिंह द्वारा किल्मोड़ा वानस्पतिक नाम बरबरीफ एरीसटाटा पर शोध शुरू किया। नैनीताल के अयारपाटा क्षेत्र से किल्मोड़ा के सैंपल लिए गए। चूहों

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सड़क निर्माण के दौरान मिली प्राचीन गुफा; गुफा की विस्तृत जानकारी का इंतज़ार

पिथौरागढ़ : मूनाकोट ब्लॉक में सड़क निर्माण के दौरान प्राचीन गुफा का द्वार मिलने से सड़क निर्माण कार्य रोक दिया गया है। जिला प्रशासन को

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रामसेतु से जुड़े कुछ अनकहे तथ्य- भूगर्भ वैज्ञानिकों, आर्कियोलाजिस्ट की टीम ने स्वीकारा रामसेतु का अस्तित्व

नई दिल्ली : संकीर्ण राजनीतिक कारणों से भले ही वर्ग विशेष के लोग देश में  रामसेतु की ऐतिहासिकता और प्रामाणिकता को खारिज करते रहते हैं

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गूगल के डूडल में छाये पंडित नैन सिंह रावत ने बिना तामझाम के 19वीं शताब्दी में पूरा तिब्बत नाप लिया

  अंग्रेज सरकार ने 1877 में बरेली के पास 3 गांवों की जागीरदारी उन्हें उपहार स्वरूप दी। इसके अलावा उनके कामों को देखते हुए

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सर्वेयर पंडित नैन सिंह रावत को समर्पित; सर्च इंजन गूगल का आज का डूडल

देहरादून (संवाददाता) : आज पंडित नैन सिंह रावत का जन्म दिन है। पंडित नैन सिंह रावत ऐसे सर्वेयर थे जिन्होंने पूरा हिमालय, तिब्बत कदमों से नापा. 

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बागनाथ मंदिर में क्यों कैद हैं?आठवीं से लेकर दसवीं सदी तक की मूर्तियां; इनकी पूजा-अर्चना तक नहीं होती

1996 में पुरातत्व विभाग ने मंदिर को अपने कब्जे में लिया। इसके बाद आठवीं से लेकर दसवीं सदी के शिलालेख भी लोहे की जाली

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बख्शाली पांडुलिपि की कार्बन डेटिंग ने खोले शून्य के राज;शून्य का प्रयोग चार सौ साल पहले, 400 AD से किया जा रहा था

बख्शाली पांडुलिपि की कार्बन डेटिंग के जरिए शून्य के प्रयोग की तिथि को निर्धारित किया है। पहले ये माना जाता रहा है कि आठवीं

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