अल्मोड़ा। अब अल्मोड़ा के किसानों के लिए गेंदे के फूल की खेती नई आशा और आमदनी का जरिया बनेगी। गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान कोसी कटारमल ने ग्रामीण तकनीकी परिसर (आरटीसी) में पहली बार गेंदे की व्यावसायिक खेती का सफल मॉडल तैयार किया है, जिसने स्थानीय किसानों में उत्साह भर दिया है।
संस्थान के वैज्ञानिकों ने स्थानीय जलवायु, मृदा और परंपरागत कृषि पद्धतियों को ध्यान में रखते हुए मार्च के अंत में गेंदे का रोपण किया। मई से फूल आने लगे और अध्ययन में पाया गया कि अल्मोड़ा जैसे क्षेत्रों में साल के लगभग 10 महीने खुले में इसकी खेती संभव है, जबकि दिसंबर-जनवरी के दो माह के लिए पालीहाउस की जरूरत पड़ सकती है।
कम जगह, ज्यादा मुनाफा
अध्ययन के मुताबिक, यदि किसान मात्र 4,000 वर्ग फीट क्षेत्र में गेंदे के 1,000 पौधे लगाते हैं, तो अप्रैल से सितंबर के बीच लगभग ₹25,000 के खर्च पर वे ₹1 लाख से अधिक की आमदनी केवल पुष्प विक्रय से कमा सकते हैं।
इस अभिनव प्रयोग को अब धरातल पर व्यापक स्तर पर उतारने की योजना है, जिससे अल्मोड़ा के किसानों को आजीविका का एक स्थायी और लाभदायक विकल्प मिल सके।

