Sunday, March 8, 2026
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जंगली फल और बीज बनेंगे स्वरोजगार का जरिया, वैज्ञानिक कर रहे इस योजना पर काम

अल्मोड़ा। अमूमन जंगली फल हों या उनके बीज, बेकार समझे जाते हैं। अब यही जंगली उत्पाद पर्वतीय क्षेत्रों में स्वरोजगार का जरिया बनेंगे। इनमें पौष्टिक तत्व व ऊर्जा परंपरागत फल व बीजों के बराबर या उनसे ज्यादा मात्रा में रहती है, लिहाजा पोषाहार भी मिलेगा। वैज्ञानिकों की मुहिम रंग लाई तो कुमाऊं ही नहीं देश के हिमालयी राज्य गढ़वाल की थीम पर अपने वन्य उत्पादों के मूल्यवर्धन से निर्मित उच्च उत्पाद ब्रांड बाजार में उतार स्वरोजगार को नया आयाम मिल सकेगा।

दरअसल, राष्ट्रीय हिमालयी अध्ययन मिशन के नोडल इंस्टीट्यूट जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण शोध एवं सतत विकास संस्थान कोसी कटारमल (अल्मोड़ा) की अगुवाई में हिमालय के वन क्षेत्रों में पाए जाने वाले जंगली फल व बीजों पर चमोली (गढ़वाल) में लंबा शोध चला। सफलता से उत्साहित वैज्ञानिक अब इन वन्य उत्पादों को कुमाऊं ही नहीं देश के अन्य हिमालयी राज्यों में भी आर्थिकी का आधार बनाएंगे। चमोली की महिला स्वयं सहायता समूह को मॉडल मान योजना बना रहे।

ऐसे खुले स्वरोजगार के द्वार

केंद्रीय वन पर्यावरण व जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (भारत सरकार) के निर्देशन में जीबी पंत पर्यावरण शोध संस्थान अल्मोड़ा ने उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) को यह प्रोजेक्ट दिया था। यूकॉस्ट ने हिमालयन एक्शन रिसर्च सेंटर (हार्क) के साथ मिल दो वर्ष पूर्व ‘माउंटेन बीम’ की नीव रखी। अब इसे चमोली का महिला स्वयं सहायता समूह चला रहा जो अब तक 45 लाख की बिक्री कर चुकीं। विदेशों में ऑनलाइन बिक्री कर रही। करीब डेढ़ से दो हजार ग्रामीणों को स्वरोजगार भी मिला है।

ये फल व बीज बदलेंगे तस्वीर

  • बांज के बीज का चूनरा बढ़ाएगा चॉकलेट बार का जायका
  • घिंघारू (जंगली सेब), किलमोड़ा, काफल व उसका बीज आदि की चटनी
  • जंगली खुमानी, आड़ू व पुलम का जैम, जैली व चटनी
  • जंगल के कांठी अखरोट मिश्रित शहद, जिसे हनी डिप वॉलनट के नाम से बाजार में उतारा गया है।

पोषक तत्वों की भरमार

जंगली फल व बीजों में सभी प्रकार के विटामिन, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट्स, सोडियम, पोटेशियम आदि जबर्दस्त। जंगली बीजों को पीस कर बने ‘वाइल्ड रोस्टेड नटी’ में ऊर्जा का भंडार। राष्ट्रीय हिमालयी अध्ययन मिशन जीबी पंत पर्यावरण शोध संस्थान कोसी कटारमल के नोडल अधिकारी प्रो. किरीट कुमार ने बताया कि वन्य उत्पादों के मूल्यवर्धन से निर्मित उच्च उत्पाद ब्रांड को हम पूरे उत्तराखंड व अन्य हिमालयी राज्यों में भी शुरू करने की योजना बना रहे। रोजगार मुख्य उद्देश्य है। उत्तर पूर्वी राज्यों के प्रस्ताव हमें मिल गए हैं। जंगली फल व बीजों से अभी तक तीस से ज्यादा उत्पाद बनाए जा रहे। कुमाऊं पर खास फोकस है। इसीलिए अंतरराष्ट्रीय पर्वत दिवस पर संस्थान में स्टॉल लगवाए।

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