चमोली (उत्तराखंड)। देश का दूसरा सबसे ऊँचा पर्वत शिखर नंदा देवी (25,640 फीट) एक बार फिर से पर्वतारोहण के लिए खोला जा सकता है। 42 वर्षों से इस पर्वत पर चढ़ाई पर लगे प्रतिबंध के हटने की संभावना जताई जा रही है। पर्यावरणीय और सामरिक कारणों से यह पर्वत 1983 में बंद कर दिया गया था।
नंदा देवी पर्वत उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित है और यह हिमालय की सबसे प्रतिष्ठित पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है। यहां का वातावरण बेहद संवेदनशील और जैव विविधता से भरपूर है, यही कारण है कि यहां अब तक केवल धारासी पास तक ट्रैकिंग की अनुमति थी।
1983 में भारत सरकार ने पर्यावरणीय चिंताओं को देखते हुए नंदा देवी पर्वत क्षेत्र में पर्वतारोहण पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था। यह फैसला यहां की संवेदनशील पारिस्थितिकी को बचाने के लिए किया गया था।
वन विभाग और अंतर्राष्ट्रीय पर्वतारोहण संगठनों के बीच हाल ही में हुई वार्ता के बाद पर्वतारोहण गतिविधियों को नियंत्रित रूप से दोबारा शुरू करने की संभावनाएं बढ़ गई हैं। वन संरक्षक सी. रविशंकर ने बताया कि यदि प्रस्तावित योजना पारिस्थितिकीय संतुलन बनाए रखने में सक्षम होती है तो आने वाले दिनों में अनुमति दी जा सकती है।
उत्तराखंड की ऊँचाइयों में बसी नंदा देवी चोटी, जितनी खूबसूरत है, उतनी ही खतरनाक भी। अजय भट्ट बताते हैं कि इस पर्वत पर चढ़ाई करना बेहद रोमांचक होता है, लेकिन इसके साथ कई गंभीर खतरे भी जुड़े होते हैं। यह क्षेत्र हमेशा बर्फबारी की चपेट में रहता है, जिससे रास्ते फिसलन भरे और जोखिम भरे हो जाते हैं। हिमस्खलन का खतरा भी बना रहता है।
चूंकि यह इलाका उच्च हिमालय में आता है, यहां चढ़ने वाले लोगों को अक्सर हाइपोथर्मिया , माउंटेन सिकनेस और स्नो ब्लाइंडनेस जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है। सबसे बड़ी बात यह है कि अगर किसी आपात स्थिति में मदद की जरूरत पड़े, तो केवल बेस कैंप ही एकमात्र जगह है, जहां हेलीकॉप्टर को उतारा जा सकता है।
अजय भट्ट बताते हैं कि इससे पहले 1936 में दो ब्रिटिश नागरिकों – बिल तिलमैन और नोयल ऑडेल ने पहली बार इस पर्वत पर चढ़ाई की थी। इसके बाद से दुनिया भर के पर्वतारोहियों का ध्यान इस पर्वत की ओर गया।
1936 से 1982 तक करीब 9 से 10 बड़े अभियानों में 100 से ज्यादा पर्वतारोहियों ने नंदा देवी की ऊंचाई को छुआ। इनमें से कई गुप्त अभियान भी थे, जिनमें सेना और खुफिया एजेंसियाँ शामिल रहीं। लेकिन यह सफर सभी के लिए आसान नहीं रहा – कई साहसी पर्वतारोहियों ने इस कठिन चढ़ाई में अपनी जान तक गंवा दी। इस चोटी को फतह करने में लगभग 25 से 30 दिन लगते हैं – यानी ये एक ऐसा सफर है जिसमें हिम्मत, धैर्य और दृढ़ संकल्प की कड़ी परीक्षा होती है।
धार्मिक महत्व
नंदा देवी केवल एक पर्वत नहीं, बल्कि यह उत्तराखंड की आराध्य देवी मानी जाती हैं। यह क्षेत्र हर साल नंदा देवी राजजात यात्रा का मुख्य केंद्र होता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु भाग लेते हैं।
यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो 42 साल बाद इस ऐतिहासिक पर्वत की चोटी को फिर से छूने का मौका भारतीय और विदेशी पर्वतारोहियों को मिल सकता है। यह उत्तराखंड के साहसिक पर्यटन को भी नया आयाम देगा।
विशेष: नंदा देवी पर्वत 7,816 मीटर ऊँचा है और यह नंदा देवी बायोस्फियर रिजर्व का हिस्सा है, जो यूनेस्को द्वारा संरक्षित क्षेत्र है।

