मां नंदा धाम कुरुड़ को पर्यटन मानचित्र पर उच्च स्थान दिलाने और नंदा राजजात 2026 को लेकर उपजे विवाद के बीच नंदा नगर ब्लॉक सभागार में 484 गांवों की महापंचायत आयोजित की गई। महापंचायत में मां नंदा सिद्धपीठ कुरुड़ मंदिर समिति ने कुरुड़ से नंदा की बड़ी जात शुरू करने की मांग उठाई।
इससे पहले रविवार को श्रीनंदा देवी राजजात समिति नौटी ने हिमालयी महाकुंभ श्रीनंदा देवी राजजात 2026 को स्थगित करने का निर्णय लिया था, जिसके बाद यह विवाद और गहरा गया। समिति के इस फैसले से कांसुवा–नौटी से होमकुंड और वापस नौटी तक होने वाली सचल महाकुंभ का इंतजार अब और बढ़ गया है।
समिति ने राजजात स्थगित करने के पीछे कई कारण गिनाए हैं। इस वर्ष मलमास होने के कारण यात्रा सितंबर माह के अंत में समाप्त हो रही थी, जबकि यात्रा समाप्ति के समय बुग्यालों में बर्फ पड़ने की संभावना रहती है। साथ ही राजजात के पड़ावों पर आवश्यक ढांचागत सुविधाओं का कार्य भी पूरा नहीं हो पाया है। इन सभी बिंदुओं के साथ प्रशासन के पुनर्विचार पत्र को आधार बनाते हुए समिति ने यह निर्णय लिया।
रविवार को कर्णप्रयाग में आयोजित श्रीनंदा देवी राजजात समिति की कोर कमेटी की बैठक समिति अध्यक्ष एवं कांसुवा के राजकुंवर डॉ. राकेश कुंवर की अध्यक्षता में हुई। बैठक में बीते वर्ष अक्तूबर में हुई अध्ययन यात्रा की रिपोर्ट पर भी चर्चा की गई। समिति ने बताया कि मई–जून में मलमास होने के कारण होमकुंड में पूजा की तिथि 20 सितंबर पड़ रही है, जो व्यावहारिक रूप से कठिन है।
समिति के अनुसार अब वसंत पंचमी के अवसर पर यह तय किया जाएगा कि राजजात किस वर्ष आयोजित की जाएगी और उसी के अनुसार कार्यक्रम जारी किया जाएगा। इधर कुरुड़ क्षेत्र के ग्रामीणों और मंदिर समिति ने स्पष्ट किया है कि मां नंदा धाम कुरुड़ की उपेक्षा बर्दाश्त नहीं की जाएगी और उनकी मांगों को लेकर आगे भी सामूहिक निर्णय लिए जाएंगे।

