Saturday, March 7, 2026
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सोलर फेंसिंग काश्तकारों की फसल को हाथियों से रखेगी महफूज, जनवरी से होगा काम शुरू

चम्पावत। सोलर फेंसिंग काश्तकारों की फसल को हाथियों से महफूज रखेगी। चंपावत में वन विभाग टनकपुर में जंगल से लगे गांवों में फेंसिंग लगाने में 10 लाख रुपया खर्च करेगा। इसका प्रस्ताव वन मंत्रालय को भेज दिया गया है। जनवरी से बाड़ लगाने का काम शुरू कर दिया जाएगा। पहले चरण में ज्ञानखेड़ा, उचैलीगोठ, आमबाग में 25 सोलर फेंसिंग लगाई जाएगी। लगातार बढ़ रहे हाथियों के आतंक से परेशान ग्रामीण लंबे समय से विभाग से फेंसिंग बाड़ लगाने की मांग कर रहे हैं।

वन विभाग के रेंजर महेश जोशी ने बताया कि वन विभाग कई गांवों में सोलर फेंसिंग लगा चुका है, जिसके सकारात्मक परिणाम देखने में आए हैं। जिन स्थानों पर फेंसिंग की गई है वहां हाथियों एवं अन्य जंगली जानवरों के आतंक में कमी आई है। उन्होंने बताया कि गेंडाखाली और थ्वालखेड़ा में सोलर फेंसिंग मशीनें पहले ही लगाई जा चुकी हैं। फेसिंग लगाने के बाद इन गांवों में जंगली जानवरों का आतंक काफी हद तक कम हुआ है। विभाग आमबाग, उचैलीगोठ, ज्ञानखेड़ा के आसपास भी सोलर फेंसिंग तार बिछाएगा।

उन्होंने बताया कि हाथियों का सबसे अधिक आतंक ज्ञानखेड़ा, उचैलीगोठ व आमबाग गांवों में है। विभाग ने इन गांवों में सोलर फेंसिंग लगाने के लिए 10 लाख रुपये का प्रस्ताव स्वीकृति के लिए भेज दिया है। स्वीकृति मिलते ही अगले वर्ष जनवरी माह में तीनों गांवों में 25 सोलर फेंसिंग लगाई जाएंगी। दूसरे चरण में अन्य गांवों में भी बाड़ लगाई जाएगी। आमबाग की ग्राम प्रधान मोहनी चंद, पूर्व प्रधान कमला चंद, उचैलीगोठ की प्रधान पूजा महर, छीनीगोठ की पूजा जोशी ने बताया कि हाथियों का सबसे अधिक आतंक पूर्णागिरि रोड से लगे उचैलीगोठ, गैंडाखाली, थ्वालखेड़ा के अलावा नायकगोठ के कुछ हिस्से में सबसे ज्यादा है।

टनकपुर-चम्पावत हाईवे पर आमबाग, ककरालीगेट, छीनीगोठ के साथ बिचई का आधा हिस्सा भी हाथियों के निशाने पर रहता है। इन स्थानों पर आए दिन हाथी फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं। कभी-कभी तो झुग्गी झोपडियों को भी निशाना बनाते हैं जिससे जान-माल का खतरा भी रहता है। पूर्व प्रधान कमला चंद ने बताया कि वन विभाग ने ककरालीगेट से लगे गांवों में सोलर फेंसिंग लगाने का आश्वासन छह माह पूर्व दे दिया था लेकिन इस दिशा में अब तक कोई कदम नहीं उठाया गया है।

ऐसे काम करती है सोलर फेंसिंग

सोलर फेंसिंग में पावर फेस कंट्रोल के जरिए तारों में डीसी करंट दौड़ाया जाता है। करंट का झटका लगने से जानवर तार के अंदर नहीं घुस पाते हैं। यह पद्धति अब तक काफी कारगर रही है जिसकी वजह से काश्तकार फेंसिंग लगाने की मांग लगातार कर रहे हैं। नगर से लगे जिन तीन गांवों में सोलर फेंसिंग लगाई गई है, वहां हाथियों का आतंक काफी कम हो गया है, जिसे देखते हुए सोलर फेंसिंग को लेकर ग्रामीण और वन विभाग के अधिकारी उत्साहित हैं।

शीघ्र गांवों में फेंसिंग लगा दी जाएगी

रेंजर वन विभाग टनकपुर महेश सिंह बिष्ट ने बताया कि टनकपुर-चम्पावत हाईवे से लगे गांवों के अलावा हाथियों के आतंक से प्रभावित अन्य गांवों में भी में फेंसिंग लगाने की योजना तैयार कर ली गई है। शीघ्र इन गांवों में फेंसिंग लगा दी जाएगी। विभाग काश्तकारों की फसल को जंगली जानवरों से बचाने के लिए हर मुमकिन कोशिश कर रहा है।

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