Sunday, March 8, 2026
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उत्तराखंड में हाथियों की प्यास बुझाएंगे 650 तालाब, हरिद्वार और मोहंड में प्रयोग सफल रहने से वन महकमा उत्साहित

उत्तराखंड में हाथी और मानव के बीच छिड़ी जंग आने वाले दिनों में काफी हद तक कम हो जाएगी। हाथियों को जंगल में रोकने की चाबी अब जाकर वन महकमे के हाथ लगी है। बात सामने आई है कि हलक तर करने के लिए पानी की तलाश में हाथी आबादी के करीब आ रहे हैं। इसे देखते हुए अब यमुना से लेकर शारदा नदी तक राजाजी व कार्बेट टाइगर रिजर्व और इनसे सटे 12 वन प्रभागों के करीब साढ़े छह हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में 650 तालाब बनाने का निर्णय लिया गया है।प्रतिकरात्मक वन रोपण निधि प्रबंधन एवं योजना प्राधिकरण (कैंपा) में इसके लिए बजट का प्रविधान किया गया है।बाघ के बाद हाथी संरक्षण में भी उत्तराखंड महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यहां हाथियों का बढ़ता कुनबा इसकी बानगी है। पिछली गणना के मुताबिक यमुना से लेकर शारदा नदी तक के क्षेत्र में फैले हाथियों के बसेरे में इनकी संख्या 2026 पहुंच चुकी है। बावजूद इसके हाथियों के निरंतर आबादी के करीब धमकने से उनका मानव के साथ टकराव भी बढ़ा है। यही सबसे बड़ी चिंता का कारण है। इस बीच राजाजी टाइगर रिजर्व से सटे हरिद्वार में तीन हाथियों पर रेडियो कालर लगाकर किए जा रहे अध्ययन में यह बात सामने आई कि ये पानी की तलाश में गंगा नदी तक आ रहे हैं। इसे देखते हुए हाथियों के लिए गंगा नहर से जंगल में पानी की व्यवस्था की गई। परिणामस्वरूप हरिद्वार क्षेत्र में आबादी के नजदीक इनकी धमक कम हुई हैै। ऐसा ही प्रयोग राजाजी टाइगर रिजर्व के देहरादून से सटे मोहंड में भी दो साल पहले किया गया था, जिसके अच्छे नतीजे सामने आए हैं।हाथियों को जंगल में रोके रखने का यह तरीका मिलने के बाद अब वन महकमे ने उनके लिए पानी के इंतजाम पर विशेष फोकस किया है। राज्य के मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक जेएस सुहाग के अनुसार इसके लिए हाथी बहुल क्षेत्रों में कैंपा के सहयोग से बड़े तालाब बनाने का निश्चय किया गया है। राजाजी व कार्बेट टाइगर रिजर्व के साथ ही इनसे सटे 12 वन प्रभागों को ऐसे स्थल चिह्नित करने को कहा गया है, जहां तालाब बनाए जा सकें। प्रयास ये है कि इसी वर्ष इन तालाबों का निर्माण पूर्ण करा लिया जाए।हाथियों के लिए बनाए जाने वाले 650 तालाबों में वर्षभर पानी की उपलब्धता बनाए रखी जाएगी। मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक के मुताबिक कुछ स्थानों पर बोङ्क्षरग कर तालाब भरे जाएंगे, जबकि कुछ पाइप लाइन अथवा गूल के जरिये। सड़क से लगे तालाबों को टैंकरों से भी भरा जाएगा।

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