Sunday, March 8, 2026
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उत्‍तराखंड में एयर कनेक्टिविटी से बदलेगी पर्यटन की सूरत, हेली सेवाओं का धीरे-धीरे हो रहा है विस्तार

देहरादून। उत्तराखंड को अलग राज्य बने 21 वर्ष हो गए हैं और अब राज्य में हेली व हवाई सेवाएं अब धीरे-धीरे पंख फैलाने लगी हैं। इन सेवाओं के जरिये न केवल पर्वतीय इलाकों की दूरी कम हो रही है, बल्कि प्रदेश के विकास और पर्यटन को भी गति मिलने की पूरी उम्मीद है। इसीलिए अब एक बार फिर नए सिरे से हिमालय दर्शन योजना शुरू करने की कवायद तेज हो गई है।

उत्तराखंड की पर्वतीय और विषम भौगोलिक स्थिति के कारण आवागमन के लिए जनता को सड़क मार्ग पर ही ज्यादातर निर्भर रहना पड़ता है। इसे देखते हुए केंद्र सरकार के सहयोग से प्रदेश में उड़ान योजना शुरू की गई। इसके अंतर्गत देहरादून से पंतनगर और पिथौरागढ़ तक हवाई सेवा और 13 स्थानों से हेली सेवाएं शुरू करने का निर्णय लिया गया। इसके लिए इन स्थानों पर हेलीपोर्ट बनाने की कवायद तेजी से चल रही है। इस समय सात स्थानों से हेली सेवाओं का संचालन शुरू करने की योजना है।

इनमें से फिलहाल चार स्थान, यानी देहरादून से चिन्यालीसौड़, उत्तरकाशी, देहरादून से गौचर, चमोली और देहरादून से श्रीनगर तथा देहरादून से अल्मोड़ा तक हेली सेवाओं की शुरुआत की जा चुकी है। देहरादून से पंतनगर-पिथौरागढ़ हवाई सेवा भी शुरू की गई, लेकिन कुछ समय तक संचालित होने के बाद यह योजना तकनीकी कारणों से स्थगित करनी पड़ी। अब इस मार्ग पर हवाई सेवा के लिए निविदा फिर से आमंत्रित की गई हैं। फिलहाल प्रदेश में जोर हेली सेवाओं पर है। इसके लिए सात हेली मार्गों पर सेवाओं को मंजूरी मिल चुकी है, जिनमें से फिलहाल चार पर संचालन हो रहा है। जो हेली सेवाएं शुरु की गई हैं, उनके फोकस में मुख्य रूप से पर्यटक ही हैं। हालांकि, स्थानीय निवासी भी इन सेवाओं का उपयोग कर रहे हैं।

हेली सेवाओं के लिए आधारभूत ढांचा हो रहा मजबूत

उत्तराखंड में हेली सेवाओं को गति देने के लिए इससे संबधित आधारभूत ढांचे को और मजबूत बनाया जा रहा है। इस कड़ी में अब प्रदेश में केदारनाथ और देहरादून के सहस्रधारा में एयर टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) के बंकर (फ्यूल स्टेशन) बनाने की तैयारी है। इससे प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर चलने वाली हेली सेवाओं को एटीएफ के लिए लंबी उड़ान नहीं भरनी पड़ेगी। विशेष रूप से केदारनाथ हेली सेवाओं को इससे काफी लाभ मिलेगा। इसके साथ ही अब हेलीकाप्टर की वर्कशाप यानी एमआरओ (मेंटिनेंस, रिपयेटर एंड ओवरहाल) सेंटर की भी स्थापना की जा रही है, ताकि हेलीकाप्टर में तकनीकी खराबी आने की स्थिति में यहीं इन्हें ठीक किया जा सके।

इन मार्गों पर दी गई है हेली सेवाओं को मंजूरी

  • देहरादून-श्रीनगर-देहरादून
  • देहरादून-गौचर-देहरादून
  • हल्द्वानी-हरिद्वार-हल्द्वानी
  • पंतनगर-पिथौरागढ़-पंतनगर
  • चिन्यालीसौड़-सहस्रधारा-चिन्यालीसौड़
  • गौचर-सहस्रधारा-गौचर
  • हल्द्वानी-धारचूला-हल्द्वानी
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