दून टर्मिनस पर ट्रेन बेपटरी होने के मामले में रेलवे ने बड़ी कार्रवाई करते हुए आरोपी शंटिंग मास्टर के खिलाफ ऑपरेटिंग विभाग में चार्जशीट दाखिल कर दी है। संबंधित कर्मचारी को एक महीने के भीतर अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया है। दोषी पाए जाने पर उसकी पदोन्नति और वेतन वृद्धि पर रोक लगाई जा सकती है।
बताया गया कि 23 फरवरी की शाम शंटिंग के दौरान नंदादेवी एक्सप्रेस का एक कोच पटरी से उतर गया था। ट्रेन अतिरिक्त कोच को प्लेटफॉर्म नंबर पांच पर छोड़ने जा रही थी, तभी लोको पायलट को सही जानकारी नहीं मिलने पर कोच दीवार से टकरा गया। जांच में सामने आया कि शंटिंग मास्टर द्वारा सही सिग्नल नहीं दिए गए थे।
घटना के बाद भारतीय रेलवे के मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) सहित कई अधिकारी मौके पर पहुंचे और जांच के आदेश दिए गए। ऑपरेटिंग, पीडब्ल्यूआई, लोको और सिग्नल विभाग की संयुक्त जांच में 25 से अधिक पन्नों की रिपोर्ट तैयार कर मुरादाबाद मंडल कार्यालय भेजी गई। रिपोर्ट में शंटिंग मास्टर की लापरवाही की पुष्टि हुई, जिसके आधार पर चार्जशीट जारी की गई।
अधिकारियों के अनुसार आरोपी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के तहत पदोन्नति व वेतन वृद्धि पर रोक के साथ काउंसलिंग और सेफ्टी सेमिनार में भेजने की भी तैयारी है।
घटना के बाद रेलवे ने सुरक्षा मानकों में बदलाव करते हुए शंटिंग के दौरान ट्रेनों की गति 8 किमी प्रति घंटे से घटाकर 2 किमी प्रति घंटे कर दी है। स्टेशन पर नए निर्देशों के बोर्ड लगाने और सिग्नल पास करने वाले कर्मचारियों को ट्रेन के साथ चलने के निर्देश भी दिए गए हैं। इसके अलावा छह अन्य सुरक्षा नियमों में भी बदलाव किया गया है।
इस संबंध में वरिष्ठ वाणिज्य प्रबंधक आदित्य गुप्ता ने कहा कि आरोपी का पक्ष सुनने के बाद नियमानुसार सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

