Sunday, March 8, 2026
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बढ़ती महंगाई के खिलाफ कांग्रेस का जगह-जगह प्रदर्शन, उपवास पर बैठेंगे हरीश रावत

देहरादून। कांग्रेस कार्यकर्ता बढ़ती महंगाई को लेकर आज प्रदेशभर में प्रदर्शन कर सरकार का पुतला दहन कर रहे हैं। इस क्रम में राजधानी देहरादून के एस्लेहॉल सहित राज्य के अन्य इलाकों में महंगाई को लेकर त्रिवेंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और पुतला दहन किया। 

जबकि गुरुवार को ऊधमिंसह नगर में किसान आंदोलन और महंगाई को लेकर प्रदर्शन किया जाएगा। दोनों ही प्रदर्शनों की कमान खुद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने संभाली हुई है।

कांग्रेस के प्रदेश संगठन महामंत्री विजय सारस्वत के मुताबिक प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह 21 जनवरी को काशीपुर में नए कृषि कानूनों और बढ़ती मंहगाई के विरोध में आयोजित धरना-प्रदर्शन में शामिल होंगे। इसी दिन दोपहर बाद दूसरी पार्टियों से कांग्रेस में आने वालों को सदस्यता दी जाएगी। प्रीतम काशीपुर में ही घर-घर कांग्रेस, बूथ-बूथ कांग्रेस मिशन के तहत विजय रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे।

महंगाई के विरोध में हरीश रावत भी मैदान में उतरे

महंगाई के विरोध में उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत भी मैदान में उतर आए हैं। उनके मुताबिक महंगाई पर नियंत्रण पाने में भाजपा सरकार पूरी तरह से विफल रही है। सरकार की इस विफलता पर सबका ध्यान खींचने के लिए वे बुधवार को अपने देहरादून स्थित आवास पर एक घंटे का सांकेतिक धरना देंगे और उपवास पर बैठेंगे।

लक्सर : किसानों के समर्थन में युवाओं ने निकाला पैदल मार्च 

तीनों कृषि कानून वापस लेने की मांग को लेकर युवा शक्ति संगठन के कार्यकर्ताओं ने कस्बे में पैदल मार्च निकाला। उन्होंने पैदल मार्च निकालकर दिल्ली में धरने पर बैठे किसानों को अपना समर्थन दिया। देश के अलग अलग राज्य के किसान केंद्र सरकार के कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं।

इसी क्रम में मंगलवार को युवा शक्ति संगठन के कार्यकर्ताओं ने भी दिल्ली में बैठे किसानों को अपना समर्थन दिया। इसके चलते संगठन के कार्यकर्ताओं ने कस्बे के रुड़की तिराहे से एकत्र होकर गोवर्धनपुर तक पैदल मार्च निकाला।

उनका कहना था कि केंद्र सरकार के कानून किसान विरोधी हैं। किसान की जमीन केंद्र सरकार पूंजीपतियों के हाथों में सौंपना चाहती है, जो पूरी तरह से गलत है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर तत्काल वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन करने को बाध्य होंगे।

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