Sunday, March 8, 2026
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बेहतर भविष्य के लिए प्रकृति का सम्मान और संस्कृति का संरक्षण जरूरीः उपराष्ट्रपति एम.वेंकैया नायडू

देहरादून। हिमालय दिवस पर दिल्ली में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में हिमालय के संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयासों पर बल दिया गया। कहा गया कि हिमालय सबका है और सभी को इसे बचाने के लिए शिद्दत के साथ आगे आना होगा। वेबिनार के जरिए हुए कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि उपराष्ट्रपति एम.वेंकैया नायडू ने कहा कि बेहतर भविष्य के लिए प्रकृति का सम्मान और संस्कृति का संरक्षण जरूरी है। हिमालय के संरक्षण को वैज्ञानिकों, राजनीतिज्ञों, सामाजिक कार्यकत्र्ताओं और हितधारकों का साझा मंच बनाने का निर्णय लिया गया। साथ ही हिमालय से जुड़े मसलों के समाधान की राह सुझाने के मद्देनजर हिमालयीय अध्ययन केंद्र बनाने पर भी सहमति जताई गई। इस पहल को आगे बढ़ाने का जिम्मा पर्यावरणविद् पदमभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी को सौंपा गया।

हिमालय और प्रकृति विषय पर आयोजित वेबिनार को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति नायडू ने प्रकृति के संरक्षण को जनांदोलन बनाने पर जोर दिया। कहा कि हिमालय एक अमूल्य धरोहर है और यह प्रकृति को भी नियंत्रित करता है। ऐसे में यह ध्यान रखना होगा कि हिमालयी क्षेत्र का पारिस्थितिकीय तंत्र प्रभावित न हो। उन्होंने कहा कि हिमालय के संरक्षण के लिए सभी राज्यों को साथ चलना होगा। केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि हिमालय आस्था व आत्मीयता का केंद्र है। अब समय आ गया है कि हिमालय को संवारने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि हिमालय सदियों से भारत की रखवाली के लिए खड़ा है। यह भारतीय उपमहादीप में पानी व जड़ी बूटियों का प्रमुख स्नोत है। केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने खेती बाड़ी को संवारने और केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने हिमालय की स्वच्छता पर जोर दिया। नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने बताया कि आयोग भी हिमालय को लेकर तीन प्रोजेक्ट पर विचार कर रहा है। हेस्को के संस्थापक एवं पद्मभूषण डॉ. अनिल जोशी ने सकल घरलू उत्पाद की तर्ज पर पर्यावरणीय सकल उत्पाद पर जोर दिया। डॉ. जोशी के अनुसार कार्यक्रम के दौरान उपराष्ट्रपति ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री निशंक द्वारा हिमालय पर लिखी गई पुस्तक का विमोचन भी किया।

हिमालयन कल्चरल सेंटर का निर्माण पूरा

गढ़ी कैंट में हिमालयन कल्चरल सेंटर का निर्माण कार्य पूरा हो गया है। संस्कृति विभाग के लिए बनाए गए इस केंद्र में आधुनिक वास्तुकला का विशेष ध्यान रखा गया है। नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने निर्माण कार्य पूर्ण होने की जानकारी दी। 2518 वर्गमीटर क्षेत्र में बनाए गए अत्याधुनिक 825 सीटर भवन के साथ ही दिव्यांगों के लिए सुविधाएं उपलब्ध हैं। ऑडिटोरियम के साथ ही यहां 12203 वर्गमीटर क्षेत्र में निद्दमत राज्य स्तरीय संग्रहालय भवन बनाया गया है। ऑडिटोरियम भवन में डिजिटल ध्वनि प्रणाली और अत्याधुनिक ध्वनि प्रणाली प्रयोग की जा सकती है। पूरी तरह से स्वचालित फायर अलार्म और अग्निशमन प्रणाली का प्रयोग किया है।

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