देहरादून: नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने विधानसभा बजट सत्र के लिए जारी अनंतिम कार्यक्रम पर सरकार को घेरते हुए कहा कि सरकार गैरसैंण में होने वाले बजट सत्र को महज औपचारिकता बनाने की तैयारी कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रस्तावित पांच दिन के सत्र को भी पूरी तरह संचालित करने की सरकार की मंशा नहीं दिख रही है।
आर्य ने कहा कि यह पहली बार है जब सरकार विधायी परंपराओं को दरकिनार करते हुए राज्यपाल के अभिभाषण वाले दिन ही विनियोग विधेयक पेश करने जा रही है। उन्होंने कहा कि परंपरा के अनुसार वर्ष का पहला सत्र राज्यपाल के अभिभाषण से शुरू होता है और उस पर कम से कम चार दिन चर्चा होती है, इसके बाद ही विनियोग विधेयक पेश किया जाता है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि वे उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्य भी रह चुके हैं और उनकी जानकारी में उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड दोनों राज्यों में राज्यपाल के अभिभाषण के दिन बजट पेश करने की कोई मिसाल नहीं है। उन्होंने कहा कि अनंतिम कार्यक्रम राज्य सरकार की लोकतांत्रिक जवाबदेही से बचने की प्रवृत्ति को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि सदन के संचालन में नियमों के साथ परंपराओं का भी समान महत्व होता है और इन्हें केवल असाधारण परिस्थितियों में ही बदला जाता है। आर्य ने सवाल उठाया कि ऐसा कौन सा संकट है, जिसके कारण दशकों से चली आ रही परंपरा तोड़ी जा रही है।
आर्य ने आशंका जताई कि सरकार पहले ही दिन बजट पेश कर बहुमत के बल पर जल्दबाजी में इसे पारित कराकर सत्र को समय से पहले समाप्त कर सकती है। उन्होंने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सत्र कम से कम तीन सप्ताह चलाने की मांग की है, ताकि कम से कम तीन सोमवार आएं और विधायक मुख्यमंत्री से संबंधित करीब 40 विभागों के कामकाज पर सवाल पूछ सकें।

