Saturday, March 7, 2026
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सीमावर्ती गांवों में स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगा नया संबल, उत्तराखंड सरकार–आईटीबीपी के बीच ऐतिहासिक एमओयू

देहरादून। सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में उत्तराखंड सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति में मुख्यमंत्री आवास में उत्तराखंड शासन और भारत–तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के बीच ‘स्वस्थ सीमा अभियान’ के अंतर्गत एक अहम समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।

इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत और कैबिनेट मंत्री श्री सौरभ बहुगुणा भी मौजूद रहे। यह अभियान चरण–1 के रूप में पिथौरागढ़, चमोली और उत्तरकाशी जनपदों के 108 सीमावर्ती गांवों में लागू किया जाएगा, जिसका उद्देश्य दुर्गम और दूरस्थ क्षेत्रों में एकीकृत प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करना है।

एमओयू के तहत आईटीबीपी योग्य चिकित्सकों, पैरामेडिकल स्टाफ, एमआई रूम और टेली-मेडिसिन सुविधाओं के माध्यम से नियमित रूप से सीमावर्ती गांवों में स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराएगी। साथ ही लाभार्थियों के मेडिकल हेल्थ रिकॉर्ड, दवाइयों, उपकरणों और उपभोग्य सामग्रियों का समुचित प्रबंधन किया जाएगा। वहीं राज्य सरकार द्वारा जनसांख्यिकीय आंकड़े, आवश्यक चिकित्सा उपकरण, दवाइयों की निरंतर आपूर्ति और आपातकालीन निकासी व दूरसंचार सहायता सुनिश्चित की जाएगी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि स्वस्थ सीमा अभियान सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने की दिशा में एक प्रभावी पहल है। उन्होंने कहा कि यह अभियान न केवल स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करेगा, बल्कि सीमावर्ती गांवों में विश्वास, सुरक्षा और स्थायित्व को भी बढ़ावा देगा। सरकार सीमांत क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

इस अवसर पर आईटीबीपी अधिकारियों ने बताया कि उत्तराखंड सरकार के साथ स्थानीय उत्पादों की आपूर्ति को लेकर किए गए पूर्व एमओयू के तहत नवंबर 2024 से 25 प्रतिशत और मार्च 2025 से 100 प्रतिशत आपूर्ति शुरू की जा चुकी है। अब तक लगभग 11.94 करोड़ रुपये मूल्य के उत्पादों की खरीद की जा चुकी है, जिससे राज्य के पशुपालकों, मत्स्य पालकों और दुग्ध उत्पादकों को प्रत्यक्ष लाभ मिला है।

वर्ष 2026 के लिए स्थानीय उत्पादों की प्रस्तावित खरीद का भी विवरण प्रस्तुत किया गया, जिसके तहत लगभग 32.76 करोड़ रुपये की लागत से पशु उत्पाद, दूध, पनीर, सब्जियां और फल खरीदे जाने का अनुमान है। इस पहल से सीमावर्ती क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित हुए हैं और रिवर्स माइग्रेशन को बढ़ावा मिला है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम और वोकल फॉर लोकल को मजबूत करती है। प्वाइंट टू प्वाइंट मॉडल के जरिए किसानों से सीधी खरीद से 550 से अधिक सीमावर्ती निवासी लाभान्वित हुए हैं और बिचौलिया व्यवस्था पूरी तरह समाप्त हुई है। पर्यावरणीय दृष्टि से भी यह मॉडल कार्बन उत्सर्जन में कमी लाकर सतत विकास लक्ष्यों की दिशा में अहम योगदान दे रहा है।

कार्यक्रम में सचिव डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम, आईजी आईटीबीपी श्री संजय गुंज्याल सहित आईटीबीपी के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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