Saturday, March 7, 2026
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उत्तराखंडः पांच जिलों में खुलेंगे जन स्वास्थ्य केंद्र, मिलेंगी नई एंबुलेंस

देहरादून। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के वार्षिक बजट अनुमोदन में केंद्र ने उत्तराखंड को कई सौगात दी हैं। इस बार उत्तराखंड के बजट में न केवल 80 करोड़ की बढ़ोतरी की गई है बल्कि अस्पतालों के विस्तारीकरण, नई एंबुलेंस और जन स्वास्थ्य जांच केंद्रों को भी अनुमोदन दिया गया है।

नई दिल्ली में हुई बैठक में उत्तराखंड ने प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं विकसित करने के संबंध में प्रस्तुतिकरण दिया। इस पर केंद्र ने प्रदेश के बजट में बढ़ोतरी कर दी है। इस बार स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 590 करोड़ रुपये दिए गए हैं। बीते वर्ष प्रदेश को 510 करोड़ रुपये दिए गए थे। केंद्र ने राज्य को आशा कार्यकर्ताओं के 367 नए पद भी स्वीकृत किए हैं। इससे न केवल नया रोजगार सृजित होगा बल्कि राज्य के दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर हो सकेंगी। प्रदेश में अभी तकरीबन 16000 आशा कार्यकर्ता तैनात हैं। इनमें से आधी ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे रही हैं।

रोगियों को लाने और ले जाने के लिए केंद्र ने 20 एंबुलेंस की अनुमति प्रदान की है। वहीं पिथौरागढ़ के गुंजी व उत्तरकाशी में जानकीचट्टी में प्राथमिक चिकित्सा केंद्र खोलने को मंजूरी प्रदान की गई है। इससे इन दूरस्थ स्थानों में स्थानीय निवासियों के साथ ही यात्रियों को चिकित्सा सेवाएं सुलभ हो सकेंगी। प्रदेश को इस वर्ष 500 उपकेंद्रों को हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के रूप में विकसित करने को भी मंजूरी प्रदान की गई है। इससे इन स्थानों पर महिला एवं शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रम के साथ ही सभी को गैर संचारी रोगों की पहचान और निदान में आसानी होगी। इससे भी स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होगा। बैठक में पांच जनपदों में जन स्वास्थ्य केंद्रों को खोलने की मंजूरी दी गई है। इससे संक्रामक रोगों की जांच सुलभ हो सकेगी।

बैठक में उत्तराखंड की ओर से सचिव स्वास्थ्य नितेश कुमार झा, प्रभारी सचिव स्वास्थ्य डॉ. पंकज कुमार पांडेय, मिशन डायरेक्टर एनएचएम युगल किशोर पंत और महानिदेशक चिकित्सा डॉ. अमिता उप्रेती आदि मौजूद रहे।

हल्द्वानी में खुलेगा 150 बेड का मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल

प्रदेश में स्वास्थ्य का आधारभूत ढांचा मजबूत करने के साथ ही स्पेशलिस्ट सुविधा बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है। राज्य सरकार की मंशा है कि विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी दूर करने के साथ ही आम जन को मल्टी स्पेशलिटी सुविधाएं मुहैया कराई जाएं। हृदय रोग, न्यूरो, गुर्दा रोग सहित अन्य गंभीर बीमारियों के लिए उन्हें निजी अस्पतालों का रुख न करना पड़े। इसकी एक झलक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की इस वित्तीय वर्ष की पीआइपी (प्रोग्राम इम्पलीमेंटेशन प्लान) में भी दिखी है। जिसे केंद्र की मंजूरी भी मिल गई है।

दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की वार्षिक बजट अनुमोदन की बैठक में कई प्रस्तावित योजनाओं पर मुहर लग गई है। पहला हल्द्वानी के महिला अस्पताल के विस्तारीकरण को हरी झंडी मिल गई है। यह अस्पताल अभी 30 बेड का है। जिसे बढ़ाकर 100 बेड का किया जाएगा। इसके वहां महिला एवं शिशु स्वास्थ्य की बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।

दूसरा हल्द्वानी में ही 150 बेड का एक मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल खोला जाएगा। जिसमें हृदय, किडनी, न्यूरो आदि की विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध होंगी। तीसरी उपलब्धि के तौर पर जनपद देहरादून में उच्च गुणवत्तापरक रक्त सुविधाओं के लिए एक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस केंद्र रक्त कोष की स्थापना को भी मंजूरी मिल गई है। अभी सरकारी क्षेत्र में जनपद में केवल दून मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय में ही ब्लड बैंक है। इसकी भी हालत बहुत अच्छी नहीं है। अब इस केंद्र की स्थापना से आपात स्थिति में रक्त एवं इसके अन्य कॉम्पोनेंट की सुलभता होगी।

एनएचएम-एम्स से छह विधाओं में पीजी कोर्स करेंगे डॉक्टर

प्रदेश सरकार ने सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी को पूरा करने के लिए और एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य में राजकीय सेवा में कार्यरत स्नातक चिकित्सकों को एम्स ऋषिकेश में चिन्हित छह परास्नातक विधाओं में कोर्स करवाया जाएगा। दिल्ली में आयोजित बैठक में इस प्रस्ताव को भी वित्तीय स्वीकृति मिल गई है। इससे न केवल विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी दूर होगी बल्कि चिकित्सकों के कौशल विकास के लिहाज से भी यह कदम खासा अहम साबित होगा।

दरअसल, प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की भारी कमी है। वर्तमान समय में विशेषज्ञ चिकित्सकों के 1258 पद हैं, पर इसके सापेक्ष 415 ही तैनात हैं। यानि 843 पद रिक्त पड़े हैं। कार्डियोलॉजिस्ट, एनेस्थेस्टि, रेडियोलॉजिस्ट, पैथोलॉजिस्ट जैसे पद छोड़िए, सर्जन फिजीशियन, बाल रोग और स्त्री और प्रसूति रोग विशेषज्ञ तक की भारी कमी है। इस कमी को दूर करने के कई प्रयास हुए पर धरातल पर इसका असर नहीं दिखा। अब राज्य सरकार फिर नए सिरे से कोशिश कर रही है। हाल में पीजी कोर्स करने वाले सरकारी चिकित्सकों को इस अवधि में पूरा वेतन देनी की घोषणा भी सरकार ने की है। इसके अलावा सेवानिवृत्त चिकित्सकों की सेवाएं लेने, एम्स जैसे संस्थानों के साथ मिलकर नियमित चिकित्सकों के नियमित प्रशिक्षण आदि को भी प्रयास किए जा रहे हैं।

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