Sunday, March 8, 2026
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उत्तराखंड में 61 लाख से अधिक लोगों को मिलेगा पांच किलो मुफ्त अनाज

देहरादून। उत्तराखंड में अगले महीने से 61 लाख से अधिक लोगों को पांच किलो मुफ्त अनाज (तीन किलो गेहूं और दो किलो चावल) मिलेगा। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत केंद्र से राज्य सरकार को इसका आवंटन हो चुका है। खाद्य विभाग के संयुक्त आयुक्त पीएस जंगपांगी के मुताबिक मुफ्त अनाज के वितरण के लिए विभाग की ओर से सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

कोरोना संकट को देखते हुए केंद्र सरकार की ओर से लोगों को मुफ्त अनाज दिए जाने की योजना है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि उत्तराखंड को इसका आवंटन होने के बाद ऑनलाइन राशन उठाए जाने की प्रक्रिया चल रही है। इसके बाद मई से लोगों को अनाज मिलना शुरू हो जाएगा। विभाग के संयुक्त आयुक्त के मुताबिक उत्तराखंड में 61 लाख 94 हजार लोगों को अनाज दिया जाएगा।

स्मार्ट राशन कार्ड की योजना पर कोरोना का असर
प्रदेश में स्मार्ट राशन कार्ड बनाए जा रहे हैं, कुछ जिलों में 50 फीसदी से अधिक राशन कार्ड धारकों के स्मार्ट कार्ड बन चुके हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को उचित दामों पर बिना कालाबाजारी के राशन पहुंचाया जा सके, इस उद्देश्य से यह कार्ड बनाए जा रहे हैं। लेकिन कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों का इस योजना पर भी असर पड़ा है। विभाग के संयुक्त आयुक्त पीएस जंगपांगी के मुताबिक स्मार्ट कार्ड बनाए जाने का काम प्रभावित हुआ है।

मुफ्त खाद्यान्न बांटने से कतरा रहे राशन विक्रेता
मंगलौर में प्रधानमंत्री योजना के तहत सरकार ने दो महीने का मुफ्त राशन देने का निर्णय लिया है, लेकिन मुफ्त राशन बांटने को लेकर राशन डीलर खुश नहीं है। राशन डीलरों ने बैठक कर कहा कि उन्हें पिछले वर्ष बांटे गए राशन का किराया भाड़ा व किसी भी प्रकार का कोई लाभांश अभी तक नहीं मिला है, जिस कारण राशन डीलर मुफ्त खाद्यान्न को बांटने से कतरा रहे हैं।

बृहस्पतिवार को राशन डीलरों ने बैठक कर सरकार की ओर से मई और जून के लिए दिए गए मुफ्त खाद्यान्न को नहीं बांटने का निर्णय लिया है। राशन डीलरों का कहना है कि कोरोना महामारी में वह इस बार राशन नहीं बांट पाएंगे, क्योंकि इससे वायरस फैलने का खतरा है। उत्तरांचल उचित दर विक्रेता के अध्यक्ष खुशनसीब आलम ने कहा कि इस समय देश में कोरोना वायरस की दूसरी लहर कहर ढा रही है।

ऐसे में प्रधानमंत्री ने दो महीने का मुफ्त राशन दिया गया है। बीते साल भी करीब 6 महीने तक उन्होंने मुफ्त राशन बांटा था, जिसका अभी तक कोई लाभांश व भाड़ा नहीं मिला है। राशन डीलर कई बार उच्चाधिकारियों व सरकार को भी अवगत करा चुके हैं, लेकिन अभी तक उनका भुगतान नहीं किया गया है। महामंत्री शोभित गुप्ता ने बताया कि सरकार मुफ्त राशन बांटने के लिए उचित दर विक्रेताओं का शोषण कर रही है।

मुफ्त राशन में उचित दर विक्रेताओं को किराया भी अपनी जेब से लगाना पड़ रहा है, जिसका सरकार कोई भी भुगतान नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि यदि शीघ्र सरकार ने उनका पिछले वर्ष का मुफ्त राशन का भुगतान नहीं किया तो, राशन विक्रेता इस बार निशुल्क खाद्यान्न नहीं बाटेंगे। 

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