Tuesday, March 10, 2026
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एक से 10 मार्च तक गैरसैंण में होगा विधानसभा सत्र, चार को त्रिवेंद्र सरकार पेश करेगी बजट

देहरादून। उत्तराखंड में मंगलवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद और मंत्रिमंडल की बैठक संपन्न हुई। इस दौरान चार महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। शासकीय प्रवक्ता मदन कौशिक ने बताया कि आगामी एक मार्च से दस मार्च तक ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में विधानसभा सत्र का आयोजन किया जाएगा।

वहीं, चार मार्च को त्रिवेंद्र सरकार प्रदेश का बजट पेश करेगी।  उन्होंने बताया कि कुंभ मेले की गाइडलाइन जारी करने करने के लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत किया गया है। अब जल्द ही कुंभ की एसओपी जारी कर दी जाएगी। 

मंत्रिपरिषद की बैठक में हुए ये निर्णय 
1- स्वच्छ भारत मिशन में जिला स्तर पर बनाई गई समितियों में संशोधन किया गया है। समितियों में सांसद विधायक और मंत्री नामित सदस्य होंगे। 
2- जल जीवन मिशन में 97 पदों पर सहमति बनी।
3- उत्तराखंड अग्निशमन आपात सेवा अधीनस्थ अधिकारी कर्मचारी सेवा नियमावली में दो संशोधन हुए।
4- उत्तराखंड पुलिस निरीक्षक और उप निरीक्षक सेवा नियमावली में भी संशोधन किया गया।

कुंभ के स्वरूप पर निर्णायक वार्ता करे सरकार
अखिल भारतीय श्रीपंच रामानंदीय खाकी अखाड़ा के महंत मोहनदास ने कहा है कि कुंभ मेले के स्वरूप को लेकर राज्य सरकार को संतों के साथ वार्ता करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बैरागी कैंप क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाएं जल्द नहीं दी गई तो संत आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। 

पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और भारतीय संस्कृति का सबसे बड़ा पर्व कुंभ मेला 12 वर्ष बाद होता है। श्रद्धालुओं की आशाएं सनातन संस्कृति से जुड़ी हुई हैं। ऐसे में श्रद्धालुओं की भावना आहत न हों सरकार को ध्यान देना चाहिए।

श्रीमहंत मोहनदास ने मेला प्रशासन पर बैरागी कैंप क्षेत्र की उपेक्षा का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बैरागी संत लाखों की संख्या में कुंभ मेले में देशभर से हरिद्वार आते हैं। उनके लिए व्यवस्थाएं जुटाना सरकार का दायित्व है। धर्म आस्था के साथ किसी प्रकार का खिलवाड़ नहीं किया जाना चाहिए। 

उन्होंने कहा कि वृंदावन कुंभ के बाद वैष्णव संत हरिद्वार आएंगे। इसके बाद भी यदि व्यवस्था मेला प्रशासन की ओर से नहीं की जाती है, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। सरकार कोरोना काल में अपनी रैलियां कर सकती है तो फिर कुंभ के आयोजन को लेकर संतों की आस्था के साथ छेड़छाड़ क्यों की जा रही है। उन्होंने कहा कि संतों ने आंदोलन किया तो सरकार को संभालना मुश्किल होगा।

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