देहरादून— टिहरी बाँध परियोजना से प्रभावित परिवारों को आवासीय भू-खण्ड आवंटन में सामने आ रहे फर्जीवाड़े और दोहरे आवंटन के मामलों को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी सविन बंसल ने सख्त रुख अपनाया है। शनिवार को जनता दर्शन कार्यक्रम में इन मामलों की बढ़ती शिकायतों के मद्देनजर जिलाधिकारी ने सचिव सिंचाई उत्तराखण्ड शासन को विशेष जांच की संस्तुति भेजी है।
जनता दर्शन के दौरान पुलमा देवी के मामले ने इस संवेदनशील मुद्दे को उजागर किया, जिसके बाद भूमि घोटाले से जुड़े मामलों में अचानक वृद्धि देखने को मिली। पुलमा देवी द्वारा वर्ष 2007 में खरीदे गए भूखण्ड पर अन्य महिला द्वारा कब्जा किए जाने की शिकायत पर विस्तृत जांच के बाद दोहरे आवंटन और भूमि धोखाधड़ी की पुष्टि हुई। इसके बाद संबंधित भू-खण्ड की द्वितीय बार की गई भूमिधरी को निरस्त किया गया।
इसी प्रकार, अन्य शिकायतकर्ताओं सुमेर चन्द, हेमन्त कुमार और शैलेन्द्र कुमार द्वारा ग्राम अटकफार्म स्थित भू-खण्ड संख्या 28 और 29 पर कब्जा न होने तथा अन्य व्यक्ति के कब्जे की शिकायत भी सत्य पाई गई। स्थलीय जांच में यह स्पष्ट हुआ कि आवंटित भू-खण्डों पर अनधिकृत कब्जा कर लिया गया था और रिकार्ड में गड़बड़ियां हैं।
तीसरा मामला अजय चौहान की शिकायत पर आधारित है, जिसमें पुनर्वास स्थल अजबपुर कलां में भू-खण्ड संख्या बी-205 का दो बार अलग-अलग व्यक्तियों को आवंटन किया गया। बाद में विभाग को फर्जी तरीके से किए गए दोहरे आवंटन को निरस्त करना पड़ा।
जिलाधिकारी ने इन सभी मामलों को लैण्ड फ्रॉड और आपराधिक षड्यंत्र का हिस्सा मानते हुए कहा कि जिला प्रशासन ऐसे मामलों में संलिप्त व्यक्तियों को किसी भी कीमत पर बख्शने के मूड में नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोषियों को जेल भेजा जाएगा और शासन को विजिलेंस अथवा सीबीसीआईडी जैसी स्वतंत्र जांच एजेंसियों से विशेष जांच करवाने की सिफारिश की गई है।
जिलाधिकारी ने अपनी संस्तुति में यह भी कहा है कि टिहरी बाँध पुनर्वास विभाग द्वारा पूर्व में किए गए आवंटन में कई गड़बड़ियां उजागर हो चुकी हैं और ऐसे मामलों में गहराई से जांच होना आवश्यक है ताकि प्रभावित परिवारों को न्याय मिल सके और भविष्य में ऐसी अनियमितताओं की पुनरावृत्ति न हो।

