Saturday, March 7, 2026
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दून मेडिकल कॉलेज में नियुक्ति पर्व: मुख्यमंत्री धामी ने 1456 अभ्यर्थियों को सौंपे नियुक्ति पत्र

देहरादून— उत्तराखंड सरकार ने सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता और मेरिट के आधार पर चयन प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए आज एक और बड़ा कदम उठाया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को दून मेडिकल कॉलेज परिसर में आयोजित भव्य समारोह में कुल 1456 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए। इस अवसर पर शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत भी उपस्थित रहे।

इन नियुक्तियों में लोक सेवा आयोग के माध्यम से चयनित 109 समीक्षा अधिकारी और सहायक समीक्षा अधिकारी, तथा उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) के माध्यम से चयनित 1347 सहायक अध्यापक (एल.टी.) शामिल हैं।

“यह सिर्फ नौकरी नहीं, राज्य के उज्ज्वल भविष्य की नींव है” — मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री धामी ने सभी नवनियुक्त अभ्यर्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह अवसर उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। उन्होंने युवाओं से अपेक्षा जताई कि वे पूरी निष्ठा, पारदर्शिता और समर्पण के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करेंगे और अपने कार्यक्षेत्र में उत्कृष्टता के नए मानक स्थापित करेंगे।

मुख्यमंत्री ने बताया कि विगत चार वर्षों में राज्य सरकार ने 26,000 से अधिक युवाओं को सरकारी सेवाओं में नियुक्त किया है, जो अब तक की किसी भी सरकार की तुलना में दोगुनी संख्या है।

नकल प्रकरण पर सरकार की सख्ती

हाल ही में हरिद्वार के एक परीक्षा केंद्र पर सामने आए नकल प्रकरण पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया और मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया। साथ ही, सीबीआई जांच की संस्तुति और पेपर निरस्त करने का भी निर्णय लिया गया।

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि वे स्वयं धरनास्थल पर पहुंचे और युवाओं की सभी न्यायोचित मांगों को स्वीकार करने का आश्वासन दिया।

शिक्षा विभाग में नियुक्तियों का सिलसिला रहेगा जारी: शिक्षा मंत्री

इस मौके पर शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि शिक्षा विभाग में नियुक्तियों का यह सिलसिला यहीं नहीं रुकेगा। जल्द ही बीआरपी, सीआरपी, बेसिक अध्यापकों और चतुर्थ श्रेणी के पदों पर भी भर्तियां की जाएंगी।

उन्होंने सभी नवनियुक्त शिक्षकों से अपील की कि वे दुर्गम क्षेत्रों में अनिवार्य रूप से कुछ वर्षों तक सेवा दें, ताकि राज्य के सभी क्षेत्रों में शिक्षा की गुणवत्ता को समान रूप से सुनिश्चित किया जा सके।

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