Saturday, March 7, 2026
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देहरादून के सभी वार्डों को कूड़ामुक्त बनाएंगे स्वच्छता पार्क, कूड़ा प्रबंधन के साथ ही होगी रिसाइकिलिंग

देहरादून: दून में कूड़ा निस्तारण दिन-ब-दिन चुनौती बनता जा रहा है। हर रोड कई टन कूड़ा उत्सर्जित हो रहा है और उसका समुचित निस्तारण नहीं हो पा रहा है। ऐसे में स्वच्छता पार्क के जरिये नगर निगम कूड़ा प्रबंधन की व्यवस्था को दुरुस्त करने की तैयारी कर रहा है।

नथुआवाला और हर्रावाला में सफल होने के बाद अब मालसी और विजयपुर वार्ड में स्वच्छता पार्क बनाने की योजना है। इससे कूड़े के निस्तारण के साथ रिसाइकिलिंग व रीयूज को भी बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही शहर के सभी वार्डों में भूमि की तलाश कर स्वच्छता पार्क बनाने का प्रयास किया जाएगा।

वर्ष 2019 में शहर के अंतिम वार्ड नथुआवाला में शुरू किए गए स्वच्छता पार्क के अप्रत्याशित परिणाम नगर निगम को प्रेरित कर रहे हैं। घर-घर कूड़ा उठान से लेकर गीला व सूखा कूड़ा अलग-अलग करने और उसका समुचित निस्तारण करने के लिए बनाए गए स्वच्छता पार्क अब शहर के अन्य वार्डों में भी बनाने की तैयारी है।

इसके लिए फिलहाल वार्ड संख्या एक मालसी और वार्ड संख्या दो विजयपुर में प्रयास किए जा रहे हैं। महापौर सुनील उनियाल गामा ने बताया कि उक्त दोनों वार्डों में निरीक्षण कर स्वच्छता पार्क के लिए भूमि तलाशी जाएगी। साथ ही आमजन और पार्षद की राय लेकर शीघ्र स्वच्छता पार्क बनाने की कवायद शुरू की जाएगी। इससे नगर निगम की कूड़ा निस्तारण की कसरत कम होगी, साथ ही क्षेत्र का कूड़ा क्षेत्र में ही सही ढ़ग से निस्तारित कर दिया जाएगा। इसके बाद अन्य वार्डों में भी धीरे-धीरे स्वच्छता पार्क बनाने का प्रयास किया जाएगा।

गीले कूड़े से खाद, सूखा कूड़ा रिसाइकिल
नथुआवाला वार्ड के पार्षद पति अनूप डोभाल ने बताया कि जुलाई 2019 में वार्ड में उन्होंने अपनी परिवार की भूमि पर स्वच्छता पार्क की शुरुआत की थी। इसका जिम्मा एनजीओ को सौंपा गया है। जो घर-घर कूड़ा उठान से लेकर गीला-सूखा कूड़ा अलग-अलग कर निस्तारित करता है।

कूड़े से प्लास्टिक, कपड़ा, टिन, लोहा, कांच आदि को अलग कर रिसाइकिलिंग के लिए बेच दिया जाता है। जबकि, गीला कूड़ा कंपोस्ट खाद बनाने में प्रयुक्त होता है। खाद को क्षेत्र में ही बेच दिया जाता है। एनजीओ की ओर से ही कूड़ा उठान का शुल्क वसूला जाता है और अपने कर्मचारियों का वेतन दिया जाता है। इससे नगर निगम के ऊपर वार्ड के कूड़ा निस्तारण का दबाव नहीं रहता।

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