Saturday, March 7, 2026
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पानी की कमी से नहीं मुरझाएंगे पौधे, भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान ने विकसित की अनोखी तकनीक

देहरादून। पौधरोपण के बाद पौधों के मुरझाने की एक बड़ी वजह पानी की कमी होती है। लेकिन अब इस समस्या का समाधान भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान ने ढूंढ निकाला है। संस्थान ने एक नई तकनीक विकसित की है, जिससे 90% तक पौधरोपण के सफल होने की संभावना है।

संस्थान के मृदा एवं सस्य विज्ञान विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. डीवी सिंह ने बताया कि इस तकनीक को ‘सब सरफेस प्लाटिंग’ कहा जाता है। इस पद्धति के तहत करीब ढाई फीट लंबे पौधों को लगाया जाता है, जिनकी जड़ें मिट्टी की गहराई तक जाती हैं, जहां पर नमी अपेक्षाकृत अधिक होती है।

कैसे काम करती है तकनीक?

पौधरोपण के बाद पौधे के ऊपर एक फीट लंबा खोखला बांस या पाइप डाला जाता है। इससे पौधे की जड़ें सीधे गहराई की ओर विकसित होती हैं, जहां अधिक नमी उपलब्ध रहती है। इस तरह, पौधे को ऊपर से कम पानी देने की जरूरत होती है और वह प्राकृतिक रूप से नीचे की नमी से पोषण प्राप्त करता है।

सफल ट्रायल, सकारात्मक नतीजे

इस तकनीक का ट्रायल सेलाकुई, बुग्गावाला, लखवाड़ और राजस्थान के अलवर में किया गया, जिसके परिणाम काफी उत्साहजनक रहे। वर्ष 2016 से चल रहे इस अध्ययन में पाया गया कि इस तकनीक से लगाए गए 90% तक पौधे जीवित रहे, जबकि पारंपरिक तरीकों में यह दर काफी कम होती है।

सिर्फ 10 रुपये अधिक लागत में बढ़ेगी सफलता

डॉ. सिंह ने बताया कि इस तकनीक को अपनाने में पारंपरिक विधि की तुलना में सिर्फ 10 रुपये प्रति पौधा अधिक लागत आती है, लेकिन इसके बदले पौधे के जीवित रहने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।

हरियाली अभियान को मिल सकती है नई रफ्तार

जलवायु परिवर्तन और जल संकट के दौर में यह तकनीक हरियाली बढ़ाने के सरकारी और गैर-सरकारी प्रयासों को नई दिशा दे सकती है। यदि इस पद्धति को बड़े पैमाने पर अपनाया जाए, तो कम पानी में भी अधिक पौधे बचाए जा सकते हैं और पर्यावरण को मजबूती मिल सकती है।

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