Saturday, March 7, 2026
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पिथौरागढ़ से देहरादून के बीच शुरू हुई सस्ती हवाई सेवा अभी भी पड़ी है बंद

देहरादून। राज्य में एक वर्ष पूर्व उड़ान योजना के अंतर्गत पिथौरागढ़ से देहरादून के बीच शुरू हुई सस्ती हवाई सेवा हिचकोले खाने के बाद अभी बंद पड़ी है। कई बार इसे शुरू करने की बात कही गई, लेकिन अभी तक यात्री उड़ान का इंतजार कर रहे हैं। दरअसल, एक साल पहले केंद्र सरकार की यह बहुप्रतीक्षित योजना शुरू हुई थी। इस योजना के तहत नौ सीटर विमान देहरादून से पिथौरागढ़ व पिथौरागढ़ से देहरादून के बीच संचालित किया गया। इसका किराया काफी कम था और एक तरफ के सफर में 35 से 40 मिनट का समय लगता है। देहरादून से पिथौरागढ़ का सड़क से सफर 16 घंटे का है। ऐसे में हवाई सेवा स्थानीय नागरिक व पर्यटकों के लिए मुफीद साबित हो रही थी। इस बीच विमान में तकनीकी खराबी आ गई। इसके बाद यह सेवा एक बार बंद हुई, तो अब तक भी फिर दोबारा शुरू नहीं हो पाई है।

नहीं मिल पाया खर्च का हिसाब

परिवहन निगम को सरकार ने बस अड्डे की जमीन के लिए 1.70 करोड़ रुपये मंजूर किए। निगम को यह धनराशि वन विभाग से जमीन लेने पर उसे देनी थे। इस बीच अन्य स्थान पर निगम को जमीन मुफ्त में मिल गई, निगम खुश। नियमानुसार, सरकार से मिली धनराशि वापस की जानी थी, लेकिन अधिकारियों ने बिना शासन की अनुमति के इसे दूसरी जगह खर्च कर दिया। किसी ने तब ध्यान भी नहीं दिया। ऑडिट हुआ तो यह बात सामने आई। धनराशि कहां खर्च हुई, यह किसी को पता नहीं। इतना जरूर बताया गया कि उच्च स्तर से निर्देश मिले, तो यह राशि निगम के कार्यों में ही खर्च हो गई। ऐसे में शासन ने इसे वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में लाते हुए जांच कराने का निर्णय लिया। जांच अपर सचिव को सौंपी गई। जांच सौंपे एक साल हो चुका है, लेकिन अभी तक भी यह पूरी नहीं हो पाई है।

कब मिलेगी मुफ्त यात्रा की सुविधा

प्रदेश में एचआइवी संक्रमित रोगियों की समस्याओं को देखते हुए सरकार ने इन्हें इलाज के लिए आने-जाने को परिवहन निगम की बसों में मुफ्त सफर की सुविधा देने का निर्णय लिया। मरीजों को भी इस खबर से बड़ी राहत मिली। उम्मीद जगी कि अब उन्हें इलाज को जाने के लिए किसी के भरोसे नहीं रहना पड़ेगा। अफसोस यह कि यह निर्णय अभी तक धरातल पर नहीं उतर पाया है। दरअसल, एक वर्ष पहले राज्य एड्स काउंसिल की बैठक हुई। इस बैठक में निर्णय लिया गया कि एड्स के मरीजों को एंटी रेट्रोवाइरल ट्रीटमेंट (एआरटी) सेंटर जाने के लिए उत्तराखंड रोडवेज की बसों में मुफ्त यात्रा सुविधा दी जाएगी। प्रदेश के एचआइवी संक्रमित व्यक्ति, जो प्रदेश का मूल व स्थायी निवासी हैं और राज्य के एआरटी केंद्र में इलाज करा रहे हैं, उन्हें आर्थिक सहायता के लिए एक हजार रुपये पेंशन दी जाएगी और इसका सारा खर्च स्वयं राज्य सरकार उठाएगी।

कब तैयार होगी समिति की रिपोर्ट

प्रदेश की जेलों में बंद कैदियों की स्थिति में सुधार, उनके रहन-सहन में आ रही दिक्कतों को सुप्रीम कोर्ट ने समझा और प्रदेश सरकारों को उचित कदम उठाने के निर्देश दिए। निर्देशों के क्रम में प्रदेश सरकार भी सक्रिय हुई। कैदियों से संबंधित वर्षों पुराने कानून को बदलने का निर्णय लिया गया। इसके लिए बाकायदा अपर सचिव गृह की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति बनाई गई। इसमें अपर सचिव न्याय और महानिरीक्षक जेल भी शामिल थे। इन्हें जेलों के पुराने कानूनों का अध्ययन करने को कहा गया। उम्मीद जताई गई कि समिति वर्षों पुराने कानूनों के स्थान पर मॉडल जेल मैनुअल को जगह देगी। प्रदेश में पहले से ही जिलों में निर्धारित क्षमता से अधिक कैदी बंद हैं। ऐसे में उम्मीद जगी कि इससे जेलों की हालत कुछ ठीक होगी। व्यवस्था में परिवर्तन आएगा और जेलों का प्रबंधन भी सुधरेगा। अफसोस, यह रिपोर्ट अभी तक तैयार नहीं हो पाई है।

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