Tuesday, March 10, 2026
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बच्चो में संस्कार होना अभिवाहको की जिम्मेदारी,देश के युवा पाश्चात्य संस्कृति से ओ रहा प्रभावित,जो चिंताजनक-मुख्यमंत्री

बाल अधिकार संरक्षण आयोग की ओर से ‘बच्चों में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति, रोकथाम और पुनर्वास’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला का शुभारम्भ किया गया इस मौके पर मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने कार्यशाला में मुख्य अथिति के रूप में शिरकत कि। मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने कहा कि युवाओं में नशे की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है। नशा समेत तमाम विकृतियों से बच्चों को बचाने के लिए उन्हें संस्कारवान बनाना होगा साथ ही हमे पश्चिमी सभ्यता से प्रभावित नही होना चाहिये।बाल आयोग की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री तीरथ सिहं रावत मुख्य अतिथि के रूप में पहुँचे।मुख्यमंत्री ने बच्चो में संस्कार से लेकर किस तरह बच्चो को अच्छे भविष्य की ओर मार्ग दिखाया जाय इस पर अपने विचार रखे।मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों पर अच्छे संस्कारों का होना बहुत जरूरी है साथ ही उन्होंने कहा कि संस्कारित बच्चे जीवन के किसी भी क्षेत्र में असफल नहीं होते। इसके अलावा उन्होंने कहा कि नशा मुक्ति को लेकर जमीनी स्तर पर जागरूकता अभियान चलाए जाने चाहिए बच्चे स्कूल से ज्यादा समय अपने घर पर बिताते हैं लिहाजा बच्चों को संस्कारवान बनाने की जिम्मेदारी अभिभावकों की भी है। बच्चों की गतिविधियों पर बराबर नजर बनाने की जरूरत है ताकि उन्हें गलत दिशा में जाने से रोका जा सके। उन्होंने कहा कि पश्चात्य देश भारतीय संस्कृति की महानता को समझ चुके हैं, इसलिए अब वह हमारी संस्कृति का अनुशरण कर रहे हैं। लेकिन चिंताजनक बात यह है कि हमारे देश के युवा पाश्चात्य संस्कृति से प्रभावित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि नशा मुक्ति के लिए चलाए जा रहे अभियान में सिर्फ सरकारी प्रयास ही पर्याप्त नहीं हो सकते इसके लिए सामाजिक संगठनों, संस्थाओं और समाज के गणमान्य लोगों को भी आगे आना होगा। नशा विमुक्ति को लेकर व्यापक जन जागरूकता अभियान चलाए जाने की भी आवश्यकता है।

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