Saturday, March 7, 2026
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मुख्यमंत्री धामी का आह्वान: ‘बुके नहीं, बुक दीजिए’ — पुस्तकों और मातृभाषाओं को बढ़ावा देने पर जोर

देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि चाहे आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (AI) कितना भी उन्नत क्यों न हो जाए, किताबों का कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने समाज से अपील की कि किसी भी कार्यक्रम में “बुके नहीं, बुक दीजिए” ताकि पुस्तक पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा मिले और लेखकों को प्रोत्साहन भी मिल सके।

मुख्यमंत्री आवास में आयोजित कार्यक्रम के दौरान धामी ने वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक जय सिंह रावत की पुस्तक “उत्तराखंड राज्य का नवीन राजनीतिक इतिहास” का विमोचन किया। यह पुस्तक उत्तराखंड की 25 वर्ष की राजनीतिक यात्रा, प्रशासनिक विकास तथा राज्य गठन के बाद के महत्वपूर्ण घटनाक्रमों का तथ्यपरक और शोधपरक संकलन प्रस्तुत करती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इतिहास लेखन एक गंभीर दायित्व है, जिसमें तथ्य, दृष्टि और ईमानदारी का होना जरूरी है। उन्होंने रावत द्वारा दुर्लभ दस्तावेज़ों, प्रेस कतरनों और राजनीतिक घटनाओं का सूक्ष्म विश्लेषण करते हुए राज्य के ढाई दशक के राजनीतिक दौर का सटीक चित्रण करने की सराहना की। उन्होंने कहा कि पांच भागों में विभाजित यह पुस्तक शोधार्थियों, विद्यार्थियों और लोक प्रशासन की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए विशेष उपयोगी सिद्ध होगी।

स्थानीय भाषाएँ—सरकार की प्राथमिकता

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री धामी ने गढ़वाली, कुमाऊँनी और जौनसारी सहित सभी क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिक समय में डिजिटल माध्यमों के साथ सामंजस्य रखते हुए मातृभाषाओं के डिजिटलाइजेशन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक युवा अपनी जड़ों से जुड़ सकें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार स्थानीय भाषाओं में लेखन, गीत-संग्रह, शोध कार्य और डिजिटल कंटेंट तैयार करने वाले विद्यार्थियों को प्रोत्साहन देने के लिए प्रतियोगिताएँ आयोजित कर रही है। उन्होंने कहा— “भाषा, संस्कृति और रीति–रिवाज़ केवल अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि हमारी पहचान और विरासत की नींव हैं।”

उन्होंने अभिभावकों, शिक्षकों और युवाओं से आग्रह किया कि घरों और विद्यालयों में अपनी स्थानीय बोलियों का अधिकतम उपयोग करें और साहित्य व लोकसंस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का प्रयास करें।

किताबों का महत्व और नई पीढ़ी के लिए संदेश

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि इंटरनेट के युग में जानकारी आसानी से उपलब्ध हो जाती है, लेकिन किताबें हमारी सोच को गहराई और स्थिरता प्रदान करती हैं। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को यह समझाने की आवश्यकता है कि हमारे पूर्वजों ने कितनी कठिनाइयों के बीच अपनी भाषा और संस्कृति की रक्षा की, और यही विरासत उन्हें आगे बढ़ानी है।

कार्यक्रम में कई गणमान्य लोग उपस्थित

इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री एवं महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, विधायक बृज भूषण गैरोला, पत्रकार, साहित्यकार एवं अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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